अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मुनिबर अतिथि प्रानप्रिय पाए। कंद मूल फल मधुर मगाए।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दश्रेष्ठ मुनि वाल्मीकिजीने प्राणप्रिय अतिथियोंको पाकर उनके लिये मधुर कन्द, मूल और फल मँगवाये। श्रीसीताजी, लक्ष्मणजी और रामचन्द्रजीने फलोंको खाया। तब मुनिने उनको [विश्राम करनेके लिये] सुन्दर स्थान बतला दिये॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 447 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
मुनिबर अतिथि प्रानप्रिय पाए। कंद मूल फल मधुर मगाए।।
सिय सौमित्रि राम फल खाए। तब मुनि आश्रम दिए सुहाए।।
स्रोत अभिलेख 2.125 · पुस्तक पृ. 447, 448
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 मुनिबर अतिथि प्रानप्रिय पाए। कंद मूल फल मधुर मगाए।।
English explanation
Having received guests as dear as life itself, the eminent sage had delicious tubers, roots, and fruits brought.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मुनिबर | श्रेष्ठ मुनि ने | the eminent sage |
| अतिथि | अतिथियों को | guests |
| प्रानप्रिय | प्राणों के समान प्रिय | as dear as life itself |
| पाए | पाया | received |
| कंद | कंद | edible tubers |
| मूल | जड़ें | edible roots |
| फल | फल | fruits |
| मधुर | मीठे, स्वादिष्ट | sweet, delicious |
| मगाए | मँगवाए | had brought |
2 सिय सौमित्रि राम फल खाए। तब मुनि आश्रम दिए सुहाए।।
English explanation
Sita, Lakshmana, and Rama ate the fruits. Then the sage provided them with pleasant hermitage dwellings.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सिय | सीता ने | Sita |
| सौमित्रि | सुमित्रा के पुत्र लक्ष्मण ने | Lakshmana, son of Sumitra |
| राम | राम ने | Rama |
| फल | फल | fruits |
| खाए | खाए | ate |
| तब | तब, उसके बाद | then |
| मुनि | मुनि ने | the sage |
| आश्रम | आश्रम के निवास | hermitage dwellings |
| दिए | दिए | provided |
| सुहाए | सुंदर, सुखद | pleasant, lovely |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.125
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 447
- सहायक विषय
- श्रीराम-वाल्मीकि-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 447, 448
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।