अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मुनिहि सोच पाहुन बड़ नेवता। तसि पूजा चाहिअ जस देवता।।
मूल पाठ
मुनिहि सोच पाहुन बड़ नेवता। तसि पूजा चाहिअ जस देवता।।
सुनि रिधि सिधि अनिमादिक आई। आयसु होइ सो करहिं गोसाई।।
स्रोत अभिलेख 2.213 · पुस्तक पृ. 520, 521
भावार्थ
मूल पाठ के बादमुनिको चिन्ता हुई कि हमने बहुत बड़े मेहमानको न्योता है। अब जैसा देवता हो, वैसी ही उसकी पूजा भी होनी चाहिये। यह सुनकर ऋद्धियाँ और अणिमादि सिद्धियाँ आ गयीं [और बोलीं—] हे गोसाईं! जो आपकी आज्ञा हो सो हम करें॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 520 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 मुनिहि सोच पाहुन बड़ नेवता। तसि पूजा चाहिअ जस देवता।।
English explanation
The sage reflected with concern that he had invited a distinguished guest: the honour offered should befit the deity being honoured.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मुनिहि | मुनि को | to the sage |
| सोच | चिंता हुई | felt concern |
| पाहुन | अतिथि को | the guest |
| बड़ | बड़े अथवा प्रतिष्ठित | distinguished |
| नेवता | निमंत्रण दिया है | has been invited |
| तसि | वैसी | corresponding |
| पूजा | पूजा अथवा आदर-सत्कार | worship or honour |
| चाहिअ | होना चाहिए | should be |
| जस | जैसा | according to what kind of |
| देवता | देवता | deity |
2 सुनि रिधि सिधि अनिमादिक आई। आयसु होइ सो करहिं गोसाई।।
English explanation
Hearing this, prosperity and the powers beginning with anima arrived and said, ‘Master, we shall do whatever you command.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | having heard |
| रिधि | समृद्धि की शक्ति | the power of prosperity |
| सिधि | अलौकिक सिद्धियाँ | supernatural powers |
| अनिमादिक | अणिमा आदि | anima and the other powers |
| आई | आ गईं | arrived |
| आयसु | आज्ञा | command |
| होइ | हो | may be given |
| सो | वही | that |
| करहिं | हम करें | we shall do |
| गोसाई | हे स्वामी | O master |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.213
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 520
- सहायक विषय
- भरद्वाजद्वारा भरतका सत्कार
- मुद्रित पृष्ठ
- 520, 521
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।