अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मीजि हाथ सिरु धुनि पछिताई। मनहँ कृपन धन रासि गवाँई।।
मूल पाठ
मीजि हाथ सिरु धुनि पछिताई। मनहँ कृपन धन रासि गवाँई।।
बिरिद बाँधि बर बीरु कहाई। चलेउ समर जनु सुभट पराई।।
स्रोत अभिलेख 2.144 · पुस्तक पृ. 463, 464
भावार्थ
मूल पाठ के बादसुमन्त्र हाथ मल-मलकर और सिर पीट-पीटकर पछताते हैं। मानो कोई कंजूस धनका खजाना खो बैठा हो। वे इस प्रकार चले मानो कोई बड़ा योद्धा वीरका बाना पहनकर और उत्तम शूरवीर कहलाकर युद्धसे भाग चला हो!॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 463 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 मीजि हाथ सिरु धुनि पछिताई। मनहँ कृपन धन रासि गवाँई।।
English explanation
He wrings his hands, beats his head, and laments, like a miser who has lost his hoarded wealth.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मीजि | मलकर | wringing |
| हाथ | हाथ | hands |
| सिरु | सिर | head |
| धुनि | पीटकर | beating |
| पछिताई | पछताते हैं | laments |
| मनहँ | मानो | as though |
| कृपन | कंजूस | miser |
| धन | धन | wealth |
| रासि | संचय, ढेर | hoard |
| गवाँई | गँवा दिया | lost |
2 बिरिद बाँधि बर बीरु कहाई। चलेउ समर जनु सुभट पराई।।
English explanation
He is like a warrior who, after pledging valor and having himself called a great hero, flees the battle.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिरिद | वीरता का प्रण या प्रतिष्ठा | pledge or reputation of valor |
| बाँधि | बाँधकर, धारण करके | binding oneself to, assuming |
| बर | श्रेष्ठ | great |
| बीरु | वीर | hero |
| कहाई | कहलाकर | having oneself called |
| चलेउ | चल दिया | went away |
| समर | युद्ध से | from battle |
| जनु | मानो | as though |
| सुभट | योद्धा | warrior |
| पराई | भागकर | fleeing |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.144
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 463
- सहायक विषय
- सुमन्त्रका अयोध्याको लौटना और सर्वत्र शोक देखना
- मुद्रित पृष्ठ
- 463, 464
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