अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
भए अजस अघ भाजन प्राना। कवन हेतु नहिं करत पयाना।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दये प्राण अपयश और पापके भाँड़े हो गये। अब ये किस कारण कूच नहीं करते (निकलते नहीं)? हाय! नीच मन [बड़ा अच्छा] मौका चूक गया। अब भी तो हृदयके दो टुकड़े नहीं हो जाते!॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 463 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
भए अजस अघ भाजन प्राना। कवन हेतु नहिं करत पयाना।।
अहह मंद मनु अवसर चूका। अजहुँ न हृदय होत दुइ टूका।।
स्रोत अभिलेख 2.144 · पुस्तक पृ. 463, 464
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 भए अजस अघ भाजन प्राना। कवन हेतु नहिं करत पयाना।।
English explanation
My life-breaths have become a receptacle for dishonor and sin; why do they not depart?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भए | हो गए | have become |
| अजस | अपयश | dishonor |
| अघ | पाप | sin |
| भाजन | पात्र | receptacle |
| प्राना | प्राण | life-breaths |
| कवन | किस | what |
| हेतु | कारण से | for reason |
| नहिं | नहीं | not |
| करत | करते | make |
| पयाना | प्रस्थान, शरीर से विदा | departure from the body |
2 अहह मंद मनु अवसर चूका। अजहुँ न हृदय होत दुइ टूका।।
English explanation
Alas! The foolish mind missed its chance; even now the heart does not split in two.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अहह | हाय! | alas! |
| मंद | मूर्ख | foolish |
| मनु | मन | mind |
| अवसर | अवसर | opportunity |
| चूका | चूक गया | missed |
| अजहुँ | अब भी | even now |
| न | नहीं | not |
| हृदय | हृदय | heart |
| होत | होता | becomes |
| दुइ | दो | two |
| टूका | टुकड़े | pieces |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.144
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 463
- सहायक विषय
- सुमन्त्रका अयोध्याको लौटना और सर्वत्र शोक देखना
- मुद्रित पृष्ठ
- 463, 464
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।