अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सोच सुमंत्र बिकल दुख दीना। धिग जीवन रघुबीर बिहीना।।
मूल पाठ
सोच सुमंत्र बिकल दुख दीना। धिग जीवन रघुबीर बिहीना।।
रहिहि न अंतहुँ अधम सरीरू। जसु न लहेउ बिछुरत रघुबीरू।।
स्रोत अभिलेख 2.144 · पुस्तक पृ. 463, 464
भावार्थ
मूल पाठ के बादव्याकुल और दु:खसे दीन हुए सुमन्त्रजी सोचते हैं कि श्रीरघुवीरके बिना जीनेको धिक्कार है। आखिर यह अधम शरीर रहेगा तो है ही नहीं। अभी श्रीरामचन्द्रजीके बिछुड़ते ही छूटकर इसने यश [क्यों] नहीं ले लिया॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 463 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सोच सुमंत्र बिकल दुख दीना। धिग जीवन रघुबीर बिहीना।।
English explanation
Distraught and crushed by grief, Sumantra thinks: Shame on a life without Rama!
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सोच | सोचते हैं | thinks |
| सुमंत्र | राम के सारथी और मंत्री सुमंत्र | Sumantra, Rama’s charioteer and minister |
| बिकल | व्याकुल | distraught |
| दुख | दुःख से | by grief |
| दीना | दीन और असहाय | crushed and helpless |
| धिग | धिक्कार है | shame on |
| जीवन | जीवन | life |
| रघुबीर | रघुवंश के वीर राम | Rama, hero of Raghu’s lineage |
| बिहीना | के बिना | without |
2 रहिहि न अंतहुँ अधम सरीरू। जसु न लहेउ बिछुरत रघुबीरू।।
English explanation
This wretched body will not last in the end anyway; it failed to earn honor by dying when parted from Rama.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रहिहि | रहेगा | will remain |
| न | नहीं | not |
| अंतहुँ | अंत में भी | even in the end |
| अधम | नीच, अधम | wretched |
| सरीरू | शरीर | body |
| जसु | यश | honor |
| न | नहीं | not |
| लहेउ | प्राप्त किया | obtained |
| बिछुरत | बिछुड़ते समय | when parting from |
| रघुबीरू | रघुवीर राम | Rama, hero of Raghu’s lineage |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.144
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 463
- सहायक विषय
- सुमन्त्रका अयोध्याको लौटना और सर्वत्र शोक देखना
- मुद्रित पृष्ठ
- 463, 464
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।