अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
गुह सारथिहि फिरेउ पहुँचाई। बिरहु बिषादु बरनि नहिं जाई।।
मूल पाठ
गुह सारथिहि फिरेउ पहुँचाई। बिरहु बिषादु बरनि नहिं जाई।।
चले अवध लेइ रथहि निषादा। होहि छनहिं छन मगन बिषादा।।
स्रोत अभिलेख 2.144 · पुस्तक पृ. 463, 464
भावार्थ
मूल पाठ के बादनिषादराज गुह सारथी (सुमन्त्रजी)-को पहुँचाकर (विदा करके) लौटा। उसके विरह और दु:खका वर्णन नहीं किया जा सकता। वे चारों निषाद रथ लेकर अवधको चले। [सुमन्त्र और घोड़ोंको देख-देखकर] वे भी क्षण-क्षणभर विषादमें डूबे जाते थे॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 463 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 गुह सारथिहि फिरेउ पहुँचाई। बिरहु बिषादु बरनि नहिं जाई।।
English explanation
AI draft: Guha returned after escorting the charioteer Sumantra. His anguish of separation and sorrow cannot be described.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गुह | निषादराज गुह | Guha, the Nishada chief |
| सारथिहि | सारथी सुमंत्र को | the charioteer Sumantra (object) |
| फिरेउ | लौट आया | returned |
| पहुँचाई | पहुँचाकर | after escorting |
| बिरहु | वियोग की पीड़ा | anguish of separation |
| बिषादु | शोक | sorrow |
| बरनि | वर्णन किया | described |
| नहिं | नहीं | not |
| जाई | जा सकता | can be |
2 चले अवध लेइ रथहि निषादा। होहि छनहिं छन मगन बिषादा।।
English explanation
The Nishadas set out toward Ayodhya with the chariot, repeatedly sinking into sorrow.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चले | चल पड़े | set out |
| अवध | अयोध्या की ओर | toward Ayodhya |
| लेइ | लेकर | taking |
| रथहि | रथ को | the chariot (object) |
| निषादा | निषाद लोग | the Nishada men |
| होहि | हो जाते हैं | become |
| छनहिं | हर क्षण | at every moment |
| छन | क्षण | moment |
| मगन | डूबे हुए | immersed |
| बिषादा | शोक में | in sorrow |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.144
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 463
- सहायक विषय
- सुमन्त्रका अयोध्याको लौटना और सर्वत्र शोक देखना
- मुद्रित पृष्ठ
- 463, 464
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।