अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मिलेहि माझ बिधि बात बेगारी। जहँ तहँ देहिं कैकेइहि गारी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दसब मेल मिल गये थे (सब संयोग ठीक हो गये थे), इतनेमें ही विधाताने बात बिगाड़ दी! जहाँ-तहाँ लोग कैकेयीको गाली दे रहे हैं! इस पापिनको क्या सूझ पड़ा जो इसने छाये घरपर आग रख दी॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 382 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
मिलेहि माझ बिधि बात बेगारी। जहँ तहँ देहिं कैकेइहि गारी।।
एहि पापिनिहि बूझि का परेऊ। छाइ भवन पर पावकु धरेऊ।।
स्रोत अभिलेख 2.47 · पुस्तक पृ. 382, 383
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 मिलेहि माझ बिधि बात बेगारी। जहँ तहँ देहिं कैकेइहि गारी।।
English explanation
AI draft: In the midst of their meeting, fate spoiled matters. Everywhere, people curse Kaikeyi.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मिलेहि | मिलने के | of meeting |
| माझ | बीच में | in the midst |
| बिधि | विधाता ने | fate, as agent |
| बात | बात; बनी हुई स्थिति | matters; the situation |
| बेगारी | बिगाड़ दी | spoiled |
| जहँ | जहाँ | wherever |
| तहँ | वहाँ | there |
| देहिं | देते हैं | give; utter |
| कैकेइहि | कैकेयी को | to Kaikeyi, Dasharatha’s queen |
| गारी | गालियाँ | curses; abuse |
2 एहि पापिनिहि बूझि का परेऊ। छाइ भवन पर पावकु धरेऊ।।
English explanation
What has occurred to this sinful woman? Having thatched the house, she has set fire upon it.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एहि | इस | this |
| पापिनिहि | पापिनी को | to the sinful woman |
| बूझि | समझ में; सूझ | understanding; a notion |
| का | क्या | what |
| परेऊ | पड़ा; आया | arose; occurred |
| छाइ | छाकर; छप्पर बनाकर | having thatched |
| भवन | घर | the house |
| पर | पर | upon |
| पावकु | आग | fire |
| धरेऊ | रख दी | placed |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.47
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 382
- सहायक विषय
- श्रीराम-दशरथ-संवाद, अवध-वासियोंका विषाद, कैकेयीको समझाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 382, 383
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।