अयोध्याकाण्ड · दोहा 46 · दोहा/सोरठा
मुख सुखाहिं लोचन स्त्रवहि सोकु न हृदयँ समाइ।
मुख सुखाहिं लोचन स्त्रवहि सोकु न हृदयँ समाइ।
मनहुँ करुन रस कटकई उतरी अवध बजाइ।।46।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.46 · पुस्तक पृ. 381, 382
भावार्थ और शब्दार्थ
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1मुख सुखाहिं लोचन स्त्रवहि सोकु न हृदयँ समाइ।
मुँह सूख रहे हैं, आँखों से आँसू बह रहे हैं, और शोक हृदय में समा नहीं रहा।
English explanation
Mouths grow dry, eyes stream with tears, and hearts cannot contain the grief.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मुख | मुँह | mouths |
| सुखाहिं | सूख रहे हैं | grow dry |
| लोचन | आँखें | eyes |
| स्त्रवहि | आँसू बहाती हैं | shed tears |
| सोकु | शोक | grief |
| न | नहीं | not |
| हृदयँ | हृदय में | in the heart |
| समाइ | समाता है | can be contained |
2 मनहुँ करुन रस कटकई उतरी अवध बजाइ।।46।।
मानो करुण रस की सेना बाजे बजाते हुए अवध में आ उतरी हो।
English explanation
It was as though the army of pathos had descended upon Ayodhya with instruments sounding.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मनहुँ | मानो | as though |
| करुन | करुणा और शोक का | of sorrow and compassion |
| रस | भाव-रस | aesthetic sentiment |
| कटकई | सेना | army |
| उतरी | आ उतरी | descended; arrived |
| अवध | अयोध्या में | in Ayodhya |
| बजाइ | बाजे बजाकर | with instruments sounding |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 46
- स्रोत अभिलेख
- 2.46
- सहायक विषय
- श्रीराम-दशरथ-संवाद, अवध-वासियोंका विषाद, कैकेयीको समझाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 381, 382
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