अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
निज कर नयन काढ़ि चह दीखा। डारि सुधा बिषु चाहत चीखा।।
मूल पाठ
निज कर नयन काढ़ि चह दीखा। डारि सुधा बिषु चाहत चीखा।।
कुटिल कठोर कुबुद्धि अभागी। भइ रघुबंस बेनु बन आगी।।
स्रोत अभिलेख 2.47 · पुस्तक पृ. 382, 383
भावार्थ
मूल पाठ के बादयह अपने हाथसे अपनी आँखोंको निकालकर (आँखोंके बिना ही) देखना चाहती है, और अमृत फेंककर विष चखना चाहती है! यह कुटिल, कठोर, दुर्बुद्धि और अभागिनी कैकेयी रघुवंशरूपी बाँसके वनके लिये अग्नि हो गयी!॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 382 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 निज कर नयन काढ़ि चह दीखा। डारि सुधा बिषु चाहत चीखा।।
English explanation
She wishes to see after plucking out her eyes with her own hands; discarding nectar, she wishes to taste poison.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| निज | अपने | her own |
| कर | हाथों से | with hands |
| नयन | आँखें | eyes |
| काढ़ि | निकालकर | having plucked out |
| चह | चाहती है | wishes |
| दीखा | देखना | to see |
| डारि | छोड़कर | discarding |
| सुधा | अमृत | nectar of immortality |
| बिषु | विष | poison |
| चाहत | चाहती है | wishes |
| चीखा | चखना | to taste |
2 कुटिल कठोर कुबुद्धि अभागी। भइ रघुबंस बेनु बन आगी।।
English explanation
Crooked, hard-hearted, ill-minded, and ill-fated, she has become a fire in the bamboo forest that represents Raghu’s lineage.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कुटिल | कुटिल; कपटी | crooked; deceitful |
| कठोर | कठोर हृदयवाली | hard-hearted |
| कुबुद्धि | दुर्बुद्धिवाली | ill-minded |
| अभागी | अभागी | ill-fated |
| भइ | हो गई | has become |
| रघुबंस | रघु का वंश | Raghu’s royal lineage |
| बेनु | बाँस | bamboo |
| बन | वन | forest |
| आगी | आग | fire |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.47
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 382
- सहायक विषय
- श्रीराम-दशरथ-संवाद, अवध-वासियोंका विषाद, कैकेयीको समझाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 382, 383
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।