अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
पालव बैठि पेड़ु एहिं काटा। सुख महुँ सोक ठाटु धरि ठाटा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दपत्तेपर बैठकर इसने पेड़को काट डाला। सुखमें शोकका ठाट ठटकर रख दिया! श्रीरामचन्द्रजी इसे सदा प्राणोंके समान प्रिय थे। फिर भी न जाने किस कारण इसने यह कुटिलता ठानी॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 383 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
पालव बैठि पेड़ु एहिं काटा। सुख महुँ सोक ठाटु धरि ठाटा।।
सदा रामु एहि प्रान समाना। कारन कवन कुटिलपनु ठाना।।
स्रोत अभिलेख 2.47 · पुस्तक पृ. 382, 383
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 पालव बैठि पेड़ु एहिं काटा। सुख महुँ सोक ठाटु धरि ठाटा।।
English explanation
Sitting on a branch, she cut down the very tree; amid happiness, she arranged and spread sorrow.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पालव | डाल पर | on a branch |
| बैठि | बैठकर | having sat |
| पेड़ु | पेड़ को | the tree |
| एहिं | इसने | she, as agent |
| काटा | काट दिया | cut down |
| सुख | सुख | happiness |
| महुँ | में; बीच | in; amid |
| सोक | शोक का | of sorrow |
| ठाटु | आयोजन; जमाव | an arrangement; array |
| धरि | करके; रचकर | having made; arranged |
| ठाटा | फैला दिया; खड़ा कर दिया | established; spread |
2 सदा रामु एहि प्रान समाना। कारन कवन कुटिलपनु ठाना।।
English explanation
Rama was always as dear to her as life itself; for what reason has she resolved upon such crookedness?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सदा | सदा | always |
| रामु | राम | Rama, Dasharatha’s son |
| एहि | इसे; कैकेयी को | to her, Kaikeyi |
| प्रान | प्राणों के | to her life |
| समाना | समान प्रिय | equally dear |
| कारन | कारण से | for a reason |
| कवन | किस | what |
| कुटिलपनु | कुटिलता | crookedness; deceit |
| ठाना | ठान ली | resolved upon |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.47
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 383
- सहायक विषय
- श्रीराम-दशरथ-संवाद, अवध-वासियोंका विषाद, कैकेयीको समझाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 382, 383
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।