अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सत्य कहहिं कबि नारि सुभाऊ। सब बिधि अगहु अगाध दुराऊ।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दकवि सत्य ही कहते हैं कि स्त्रीका स्वभाव सब प्रकारसे पकड़में न आने योग्य अथाह और भेदभरा होता है। अपनी परछाहीं भले ही पकड़ जाय, पर भाई! स्त्रियोंकी गति (चाल) नहीं जानी जाती॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 383 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सत्य कहहिं कबि नारि सुभाऊ। सब बिधि अगहु अगाध दुराऊ।।
निज प्रतिबिंबु बरुकु गहि जाई। जानि न जाइ नारि गति भाई।।
स्रोत अभिलेख 2.47 · पुस्तक पृ. 382, 383
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 सत्य कहहिं कबि नारि सुभाऊ। सब बिधि अगहु अगाध दुराऊ।।
English explanation
The people say: Poets speak truly that a woman’s nature is in every way elusive, unfathomable, and concealed.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सत्य | सच | truly |
| कहहिं | कहते हैं | say |
| कबि | कवि | poets |
| नारि | स्त्री का | a woman’s |
| सुभाऊ | स्वभाव | nature; disposition |
| सब | सभी | every |
| बिधि | प्रकार से | in respect; way |
| अगहु | पकड़ में न आनेवाला | elusive; beyond grasp |
| अगाध | अथाह | unfathomable |
| दुराऊ | छिपा हुआ; दुरूह | concealed; inscrutable |
2 निज प्रतिबिंबु बरुकु गहि जाई। जानि न जाइ नारि गति भाई।।
English explanation
Brother, one might sooner grasp one’s own reflection, but a woman’s ways cannot be understood.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| निज | अपना | one’s own |
| प्रतिबिंबु | प्रतिबिंब | reflection |
| बरुकु | भले ही; बल्कि | even; sooner |
| गहि | पकड़ा | grasped |
| जाई | जा सके | might be |
| जानि | जानी | understood |
| न | नहीं | not |
| जाइ | जा सकती | can be |
| नारि | स्त्री की | a woman’s |
| गति | चाल; मनोवृत्ति | ways; disposition |
| भाई | हे भाई | O brother |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.47
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 383
- सहायक विषय
- श्रीराम-दशरथ-संवाद, अवध-वासियोंका विषाद, कैकेयीको समझाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 382, 383
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।