अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मिलनि प्रीति किमि जाइ बखानी। कबिकुल अगम करम मन बानी।।
मूल पाठ
मिलनि प्रीति किमि जाइ बखानी। कबिकुल अगम करम मन बानी।।
परम पेम पूरन दोउ भाई। मन बुधि चित अहमिति बिसराई।।
स्रोत अभिलेख 2.241 · पुस्तक पृ. 544, 545
भावार्थ
मूल पाठ के बादमिलनकी प्रीति कैसे बखानी जाय? वह तो कविकुलके लिये कर्म, मन, वाणी तीनोंसे अगम है। दोनों भाई (भरतजी और श्रीरामजी) मन, बुद्धि, चित्त और अहंकारको भुलाकर परम प्रेमसे पूर्ण हो रहे हैं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 544 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 मिलनि प्रीति किमि जाइ बखानी। कबिकुल अगम करम मन बानी।।
English explanation
AI draft: How can the love of this meeting be described? It lies beyond the deeds, minds, and speech of poets.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मिलनि | मिलन की | of the meeting |
| प्रीति | प्रीति | love |
| किमि | कैसे | how |
| जाइ | जा सकती है | can be |
| बखानी | बखानी; वर्णित | described |
| कबिकुल | कवियों के समुदाय के लिए | for the community of poets |
| अगम | पहुँच से परे | beyond reach |
| करम | कर्म; कार्य | deeds; actions |
| मन | मन; विचार | mind; thought |
| बानी | वाणी | speech |
2 परम पेम पूरन दोउ भाई। मन बुधि चित अहमिति बिसराई।।
English explanation
Both brothers are filled with supreme love, forgetting mind, intellect, consciousness, and even their sense of self.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| परम | परम; अत्यंत | supreme; utmost |
| पेम | प्रेम | love |
| पूरन | भरे हुए | filled |
| दोउ | दोनों | both |
| भाई | भाई, राम और भरत | brothers, Rama and Bharata |
| मन | मन | mind |
| बुधि | बुद्धि | intellect |
| चित | चित्त; चेतना | consciousness |
| अहमिति | ‘मैं’ होने का बोध | sense of ‘I’ |
| बिसराई | भुला दिया | forgot |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.241
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 544
- सहायक विषय
- भरतजीका मन्दाकिनी-स्नान, चित्रकूटमें पहुँचना, भरतादि सबका परस्पर मिलाप, पिताका शोक और श्राद्ध
- मुद्रित पृष्ठ
- 544, 545
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।