अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मिटा मोदु मन भए मलीने। बिधि निधि दीन्ह लेत जनु छीने।।
मूल पाठ
मिटा मोदु मन भए मलीने। बिधि निधि दीन्ह लेत जनु छीने।।
समुझि करम गति धीरजु कीन्हा। सोधि सुगम मगु तिन्ह कहि दीन्हा।।
स्रोत अभिलेख 2.118 · पुस्तक पृ. 441, 442
भावार्थ
मूल पाठ के बादउनका आनन्द मिट गया और मन ऐसे उदास हो गये मानो विधाता दी हुई सम्पत्ति छीने लेता हो। कर्मकी गति समझकर उन्होंने धैर्य धारण किया और अच्छी तरह निर्णय करके सुगम मार्ग बतला दिया॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 442 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 मिटा मोदु मन भए मलीने। बिधि निधि दीन्ह लेत जनु छीने।।
English explanation
Their joy vanished and their hearts grew sad, as though fate were snatching away a treasure it had given.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मिटा | मिट गया | vanished |
| मोदु | आनंद | joy |
| मन | मन | hearts |
| भए | हो गए | became |
| मलीने | उदास | downcast |
| बिधि | विधाता | fate, the creator |
| निधि | खजाना | treasure |
| दीन्ह | दिया हुआ | previously given |
| लेत | ले रहा है | is taking away |
| जनु | मानो | as though |
| छीने | छीनकर | by snatching |
2 समुझि करम गति धीरजु कीन्हा। सोधि सुगम मगु तिन्ह कहि दीन्हा।।
English explanation
Recognizing the course of karma, they steadied themselves; after finding an easy route, they explained it.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| समुझि | समझकर | understanding |
| करम | कर्म की | of karma |
| गति | गति या विधान | course or workings |
| धीरजु | धैर्य | composure |
| कीन्हा | धारण किया | maintained |
| सोधि | पता करके | having ascertained |
| सुगम | आसान | easy to travel |
| मगु | मार्ग | route |
| तिन्ह | उन्होंने | they |
| कहि | कहकर | by telling |
| दीन्हा | बता दिया | conveyed it |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.118
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 442
- सहायक विषय
- यमुनाको प्रणाम, वनवासियोंका प्रेम
- मुद्रित पृष्ठ
- 441, 442
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।