अयोध्याकाण्ड · दोहा 118 · दोहा/सोरठा
लखन जानकी सहित तब गवनु कीन्ह रघुनाथ।
लखन जानकी सहित तब गवनु कीन्ह रघुनाथ।
फेरे सब प्रिय बचन कहि लिए लाइ मन साथ।।118।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.118 · पुस्तक पृ. 441, 442
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1लखन जानकी सहित तब गवनु कीन्ह रघुनाथ।
तब राम ने लक्ष्मण और जानकी के साथ प्रस्थान किया।
English explanation
Then Rama departed with Lakshmana and Janaki.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लखन | लक्ष्मण | Lakshmana, Rama’s brother |
| जानकी | सीता, जनक की पुत्री | Sita, Janaka’s daughter |
| सहित | के साथ | with |
| तब | तब | then |
| गवनु | प्रस्थान | departure |
| कीन्ह | किया | made |
| रघुनाथ | राम, रघुवंश के स्वामी | Rama, lord of Raghu’s lineage |
2 फेरे सब प्रिय बचन कहि लिए लाइ मन साथ।।118।।
राम ने प्रिय वचन कहकर सबको वापस भेज दिया, पर उनके मन अपने साथ लगा ले गए।
English explanation
With kind words Rama sent everyone back, yet drew their hearts along with him.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| फेरे | वापस भेज दिया | sent back |
| सब | सबको | everyone |
| प्रिय | प्रिय और स्नेहभरे | kind and affectionate |
| बचन | वचन | words |
| कहि | कहकर | having spoken |
| लिए | ले लिए | took |
| लाइ | लगाकर | drawing into attachment |
| मन | उनके मन | their hearts |
| साथ | अपने साथ | along with him |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 118
- स्रोत अभिलेख
- 2.118
- सहायक विषय
- यमुनाको प्रणाम, वनवासियोंका प्रेम
- मुद्रित पृष्ठ
- 441, 442
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।