अयोध्याकाण्ड · दोहा 119 · दोहा
जौं ए मुनि पट धर जटिल सुंदर सुठि सुकुमार।
जौं ए मुनि पट धर जटिल सुंदर सुठि सुकुमार।
बिबिध भाँति भूषन बसन बादि किए करतार॥ ११९॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.119 · पुस्तक पृ. 442, 442
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1जौं ए मुनि पट धर जटिल सुंदर सुठि सुकुमार।
AI-प्रारूप: यदि ये सुंदर और अत्यंत सुकुमार राजकुमार मुनियों के वस्त्र धारण करने वाले और जटाधारी हैं,
English explanation
AI draft: If these handsome and exceedingly delicate princes wear ascetics’ garments and have matted hair,
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जौं | यदि | if |
| ए | ये—राम और लक्ष्मण | these two—Rama and Lakshmana |
| मुनि | मुनियों के; तपस्वियों के | of ascetics |
| पट | वस्त्र | garments |
| धर | धारण करने वाले | wearing; bearers of |
| जटिल | जटाधारी | having matted hair |
| सुंदर | सुंदर | handsome |
| सुठि | अत्यंत | exceedingly |
| सुकुमार | कोमल; सुकुमार | delicate; tender |
2बिबिध भाँति भूषन बसन बादि किए करतार॥ ११९॥
तो सृष्टिकर्ता ने तरह-तरह के आभूषण और वस्त्र व्यर्थ ही बनाए।
English explanation
then the Creator has made ornaments and garments of many kinds in vain.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिबिध | विविध; तरह-तरह की | various; diverse |
| भाँति | प्रकार | kinds |
| भूषन | आभूषण | ornaments |
| बसन | वस्त्र | garments |
| बादि | व्यर्थ; निष्फल | in vain; to no purpose |
| किए | बनाए | made |
| करतार | सृष्टिकर्ता ने | the Creator |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा 119
- स्रोत अभिलेख
- 2.119
- सहायक विषय
- यमुनाको प्रणाम, वनवासियोंका प्रेम
- मुद्रित पृष्ठ
- 442, 442
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।