अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तबहिं लखन रघुबर रुख जानी। पूँछेउ मगु लोगन्हि मृदु बानी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दउसी समय श्रीरामचन्द्रजीका रुख जानकर लक्ष्मणजीने कोमल वाणीसे लोगोंसे रास्ता पूछा। यह सुनते ही स्त्री-पुरुष दु:खी हो गये। उनके शरीर पुलकित हो गये और नेत्रोंमें [वियोगकी सम्भावनासे प्रेमका] जल भर आया॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 442 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
तबहिं लखन रघुबर रुख जानी। पूँछेउ मगु लोगन्हि मृदु बानी।।
सुनत नारि नर भए दुखारी। पुलकित गात बिलोचन बारी।।
स्रोत अभिलेख 2.118 · पुस्तक पृ. 441, 442
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 तबहिं लखन रघुबर रुख जानी। पूँछेउ मगु लोगन्हि मृदु बानी।।
English explanation
Just then, understanding Rama’s intention, Lakshmana gently asked the people for the way.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तबहिं | तभी | just then |
| लखन | लक्ष्मण, राम के भाई | Lakshmana, Rama’s brother |
| रघुबर | राम का | Rama’s |
| रुख | इच्छा या संकेत | intention or indication |
| जानी | समझकर | having understood |
| पूँछेउ | पूछा | asked |
| मगु | रास्ता | the way |
| लोगन्हि | लोगों से | of the people |
| मृदु | कोमल | gentle |
| बानी | वाणी में | in speech |
2 सुनत नारि नर भए दुखारी। पुलकित गात बिलोचन बारी।।
English explanation
Hearing this, the women and men became sorrowful; their bodies shivered with emotion and their eyes filled with tears.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनत | सुनते ही | on hearing |
| नारि | स्त्रियाँ | women |
| नर | पुरुष | men |
| भए | हो गए | became |
| दुखारी | दुखी | sorrowful |
| पुलकित | रोमांचित | with hair standing on end |
| गात | शरीर | bodies |
| बिलोचन | आँखों में | in their eyes |
| बारी | आँसू | tears |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.118
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 442
- सहायक विषय
- यमुनाको प्रणाम, वनवासियोंका प्रेम
- मुद्रित पृष्ठ
- 441, 442
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।