अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
दरसनु देब जानि निज दासी। लखीं सीयँ सब प्रेम पिआसी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दऔर हमें अपनी दासी जानकर दर्शन दें। सीताजीने उन सबको प्रेमकी प्यासी देखा, और मधुर वचन कह-कहकर उनका भलीभाँति सन्तोष किया। मानो चाँदनीने कुमुदिनियोंको खिलाकर पुष्ट कर दिया हो॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 441 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
दरसनु देब जानि निज दासी। लखीं सीयँ सब प्रेम पिआसी।।
मधुर बचन कहि कहि परितोषीं। जनु कुमुदिनीं कौमुदीं पोषीं।।
स्रोत अभिलेख 2.118 · पुस्तक पृ. 441, 442
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 दरसनु देब जानि निज दासी। लखीं सीयँ सब प्रेम पिआसी।।
English explanation
then, regarding us as your maidservants, let us see you. Sita saw that they all thirsted for affection.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| दरसनु | दर्शन | the sight of you |
| देब | दीजिए | please grant |
| जानि | समझकर | regarding as |
| निज | अपनी | your own |
| दासी | दासी | maidservant |
| लखीं | देखीं | saw them |
| सीयँ | सीता ने | Sita, as the subject |
| सब | सब स्त्रियाँ | all the women |
| प्रेम | प्रेम की | for affection |
| पिआसी | प्यासी | thirsting |
2 मधुर बचन कहि कहि परितोषीं। जनु कुमुदिनीं कौमुदीं पोषीं।।
English explanation
Sita satisfied them with repeated sweet words, as though moonlight had nourished the night-blooming lilies.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मधुर | मधुर | sweet |
| बचन | वचन | words |
| कहि | कहकर | saying |
| कहि | कहकर | saying again |
| परितोषीं | उन्हें संतुष्ट किया | satisfied them |
| जनु | मानो | as though |
| कुमुदिनीं | कुमुदिनियों को | the night-blooming lilies |
| कौमुदीं | चाँदनी ने | moonlight |
| पोषीं | पोषित किया | nourished |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.118
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 441
- सहायक विषय
- यमुनाको प्रणाम, वनवासियोंका प्रेम
- मुद्रित पृष्ठ
- 441, 442
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।