अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
माथे हाथ मूदि दोउ लोचन। तनु धरि सोचु लाग जनु सोचन।।
मूल पाठ
माथे हाथ मूदि दोउ लोचन। तनु धरि सोचु लाग जनु सोचन।।
मोर मनोरथु सुरतरु फूला। फरत करिनि जिमि हतेउ समूला।।
स्रोत अभिलेख 2.29 · पुस्तक पृ. 367, 368
भावार्थ
मूल पाठ के बादमाथेपर हाथ रखकर, दोनों नेत्र बंद करके राजा ऐसे सोच करने लगे, मानो साक्षात् सोच ही शरीर धारणकर सोच कर रहा हो। [वे सोचते हैं—हाय!] मेरा मनोरथरूपी कल्पवृक्ष फूल चुका था, परन्तु फलते समय कैकेयीने हथिनीकी तरह उसे जड़समेत उखाड़कर नष्ट कर डाला॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 368 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 माथे हाथ मूदि दोउ लोचन। तनु धरि सोचु लाग जनु सोचन।।
English explanation
With a hand on his forehead, he closed both eyes, as though worry itself had taken bodily form and begun to brood.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| माथे | माथे पर | on the forehead |
| हाथ | हाथ | hand |
| मूदि | बंद करके | having closed |
| दोउ | दोनों | both |
| लोचन | आँखें | eyes |
| तनु | शरीर | body |
| धरि | धारण करके | having assumed |
| सोचु | चिंता स्वयं | worry itself |
| लाग | लगी | began |
| जनु | मानो | as though |
| सोचन | चिंता करने | to brood |
2 मोर मनोरथु सुरतरु फूला। फरत करिनि जिमि हतेउ समूला।।
English explanation
The wish-fulfilling tree of my hopes had blossomed; just as it was bearing fruit, a she-elephant seemed to destroy it, roots and all.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मोर | मेरा | my |
| मनोरथु | मन की अभिलाषा | cherished hope |
| सुरतरु | कल्पवृक्ष; इच्छापूरक दिव्य वृक्ष | divine wish-fulfilling tree |
| फूला | फूल उठा था | had blossomed |
| फरत | फल लगते समय | while bearing fruit |
| करिनि | हथिनी ने | a she-elephant |
| जिमि | मानो; जैसे | as though |
| हतेउ | नष्ट कर दिया | destroyed |
| समूला | जड़ सहित | roots and all |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.29
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 368
- सहायक विषय
- दशरथ-कैकेयी-संवाद और दशरथ-शोक, सुमन्त्रका महलमें जाना और वहाँसे लौटकर श्रीरामजीको महलमें भेजना
- मुद्रित पृष्ठ
- 367, 368
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।