अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अवध उजारि कीन्हि कैकेईं। दीन्हसि अचल बिपति कै नेईं।।
मूल पाठ
अवध उजारि कीन्हि कैकेईं। दीन्हसि अचल बिपति कै नेईं।।
स्रोत अभिलेख 2.29 · पुस्तक पृ. 367, 368
भावार्थ
मूल पाठ के बादकैकेयीने अयोध्याको उजाड़ कर दिया और विपत्तिकी अचल (सुदृढ़) नींव डाल दी॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 368 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 अवध उजारि कीन्हि कैकेईं। दीन्हसि अचल बिपति कै नेईं।।
English explanation
Kaikeyi has laid Ayodhya waste and laid an unshakable foundation for calamity.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अवध | अयोध्या | Ayodhya, the capital |
| उजारि | उजाड़ | desolate |
| कीन्हि | कर दी | made |
| कैकेईं | कैकेयी ने | Kaikeyi, Dasharatha’s queen |
| दीन्हसि | उसने डाल दी | she laid |
| अचल | अटल; अचल | unshakable |
| बिपति | विपत्ति | calamity |
| कै | की | of |
| नेईं | नींव | foundation |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.29
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 368
- सहायक विषय
- दशरथ-कैकेयी-संवाद और दशरथ-शोक, सुमन्त्रका महलमें जाना और वहाँसे लौटकर श्रीरामजीको महलमें भेजना
- मुद्रित पृष्ठ
- 367, 368
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