अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
गयउ सहमि नहिं कछु कहि आवा। जनु सचान बन झपटेउ लावा।।
मूल पाठ
गयउ सहमि नहिं कछु कहि आवा। जनु सचान बन झपटेउ लावा।।
बिबरन भयउ निपट नरपालू। दामिनि हनेउ मनहुँ तरु तालू।।
स्रोत अभिलेख 2.29 · पुस्तक पृ. 367, 368
भावार्थ
मूल पाठ के बादराजा सहम गये, उनसे कुछ कहते न बना, मानो बाज वनमें बटेरपर झपटा हो। राजाका रंग बिलकुल उड़ गया, मानो ताड़के पेड़को बिजलीने मारा हो (जैसे ताड़के पेड़पर बिजली गिरनेसे वह झुलसकर बदरंगा हो जाता है, वही हाल राजाका हुआ)॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 368 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 गयउ सहमि नहिं कछु कहि आवा। जनु सचान बन झपटेउ लावा।।
English explanation
The king froze in fear and could say nothing, like a quail swooped upon by a hawk in the forest.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गयउ | हो गए | became |
| सहमि | सहमकर | frightened |
| नहिं | नहीं | not |
| कछु | कुछ भी | anything |
| कहि | कहना | say |
| आवा | बन पड़ा; संभव हुआ | was possible |
| जनु | मानो | as though |
| सचान | बाज; शिकारी पक्षी | hawk; bird of prey |
| बन | वन में | in the forest |
| झपटेउ | झपटा | swooped upon |
| लावा | बटेर जैसा छोटा पक्षी | a small quail-like bird |
2 बिबरन भयउ निपट नरपालू। दामिनि हनेउ मनहुँ तरु तालू।।
English explanation
The king turned utterly pale, as though he were a palm tree struck down by lightning.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिबरन | विवर्ण; रंग उड़ा हुआ | pale; drained of color |
| भयउ | हो गए | became |
| निपट | बिल्कुल | utterly |
| नरपालू | राजा दशरथ | King Dasharatha |
| दामिनि | बिजली ने | lightning |
| हनेउ | प्रहार कर गिराया | struck down |
| मनहुँ | मानो | as though |
| तरु | वृक्ष | tree |
| तालू | ताड़ का | palm |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.29
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 368
- सहायक विषय
- दशरथ-कैकेयी-संवाद और दशरथ-शोक, सुमन्त्रका महलमें जाना और वहाँसे लौटकर श्रीरामजीको महलमें भेजना
- मुद्रित पृष्ठ
- 367, 368
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