अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तापस बेष बिसेषि उदासी। चौदह बरिस रामु बनबासी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दतपस्वियोंके वेषमें विशेष उदासीन भावसे (राज्य और कुटुम्ब आदिकी ओरसे भलीभाँति उदासीन होकर विरक्त मुनियोंकी भाँति) राम चौदह वर्षतक वनमें निवास करें। कैकेयीके कोमल (विनययुक्त) वचन सुनकर राजाके हृदयमें ऐसा शोक हुआ जैसे चन्द्रमाकी किरणोंके स्पर्शसे चकवा विकल हो जाता है॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 367 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
तापस बेष बिसेषि उदासी। चौदह बरिस रामु बनबासी।।
सुनि मृदु बचन भूप हियँ सोकू। ससि कर छुअत बिकल जिमि कोकू।।
स्रोत अभिलेख 2.29 · पुस्तक पृ. 367, 368
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 तापस बेष बिसेषि उदासी। चौदह बरिस रामु बनबासी।।
English explanation
Let Rama live in the forest for fourteen years, dressed as an ascetic and wholly detached from worldly life.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तापस | तपस्वी का | an ascetic’s |
| बेष | वेश | attire |
| बिसेषि | विशेष रूप से; पूर्णतः | especially; thoroughly |
| उदासी | सांसारिक आसक्ति से रहित | detached from worldly attachments |
| चौदह | चौदह | fourteen |
| बरिस | वर्ष | years |
| रामु | राम | Rama |
| बनबासी | वन में रहने वाले हों | be a forest dweller |
2 सुनि मृदु बचन भूप हियँ सोकू। ससि कर छुअत बिकल जिमि कोकू।।
English explanation
Hearing these softly spoken words, King Dasharatha was filled with sorrow, distraught like a chakravaka bird touched by moonlight.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | having heard |
| मृदु | कोमल | soft; gentle |
| बचन | वचन | words |
| भूप | राजा दशरथ | King Dasharatha |
| हियँ | हृदय में | in the heart |
| सोकू | शोक | sorrow |
| ससि | चंद्रमा की | the moon’s |
| कर | किरण | ray |
| छुअत | छूने पर | on touching |
| बिकल | व्याकुल | distressed |
| जिमि | जैसे | as |
| कोकू | चकवा पक्षी | chakravaka bird |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.29
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 367
- सहायक विषय
- दशरथ-कैकेयी-संवाद और दशरथ-शोक, सुमन्त्रका महलमें जाना और वहाँसे लौटकर श्रीरामजीको महलमें भेजना
- मुद्रित पृष्ठ
- 367, 368
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।