अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मातु समीप कहत सकुचाहीं। बोले समउ समुझि मन माहीं।।
मूल पाठ
मातु समीप कहत सकुचाहीं। बोले समउ समुझि मन माहीं।।
राजकुमारि सिखावन सुनहू। आन भाँति जियँ जनि कछु गुनहू।।
स्रोत अभिलेख 2.61 · पुस्तक पृ. 394, 395
भावार्थ
मूल पाठ के बादमाताके सामने सीताजीसे कुछ कहनेमें सकुचाते हैं। पर मनमें यह समझकर कि यह समय ऐसा ही है, वे बोले—हे राजकुमारी! मेरी सिखावन सुनो। मनमें कुछ दूसरी तरह न समझ लेना॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 394 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 मातु समीप कहत सकुचाहीं। बोले समउ समुझि मन माहीं।।
English explanation
AI draft: Rama hesitated to speak in his mother's presence; then, considering the occasion inwardly, he spoke.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मातु | माता, यहाँ कौसल्या | mother, here Kausalya |
| समीप | के पास | in the presence of |
| कहत | कहने में | in speaking |
| सकुचाहीं | संकोच करते थे | was hesitant |
| बोले | बोले | spoke |
| समउ | समय या अवसर | time or occasion |
| समुझि | समझकर | having considered |
| मन | मन | mind |
| माहीं | में | within |
2 राजकुमारि सिखावन सुनहू। आन भाँति जियँ जनि कछु गुनहू।।
English explanation
Princess Sita, listen to my counsel; do not take it otherwise in your heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राजकुमारि | हे राजकुमारी सीता | O princess Sita |
| सिखावन | सीख या उपदेश | counsel |
| सुनहू | सुनो | listen |
| आन | दूसरी | another |
| भाँति | तरह | way |
| जियँ | मन में | in your heart |
| जनि | मत | do not |
| कछु | कुछ भी | anything |
| गुनहू | विचार करो या अर्थ लगाओ | consider or interpret |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.61
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 394
- सहायक विषय
- श्रीसीता-राम-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 394, 395
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।