अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
आपन मोर नीक जौं चहहू। बचनु हमार मानि गृह रहहू।।
मूल पाठ
आपन मोर नीक जौं चहहू। बचनु हमार मानि गृह रहहू।।
आयसु मोर सासु सेवकाई। सब बिधि भामिनि भवन भलाई।।
स्रोत अभिलेख 2.61 · पुस्तक पृ. 394, 395
भावार्थ
मूल पाठ के बादजो अपना और मेरा भला चाहती हो, तो मेरा वचन मानकर घर रहो। हे भामिनी! मेरी आज्ञाका पालन होगा, सासकी सेवा बन पड़ेगी। घर रहनेमें सभी प्रकारसे भलाई है॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 394 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 आपन मोर नीक जौं चहहू। बचनु हमार मानि गृह रहहू।।
English explanation
If you wish for your own welfare and mine, heed my words and remain at home.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| आपन | अपना | your own |
| मोर | मेरा | my |
| नीक | भला | welfare |
| जौं | यदि | if |
| चहहू | चाहती हो | you desire |
| बचनु | बात या वचन | word or counsel |
| हमार | मेरा | my |
| मानि | मानकर | heeding |
| गृह | घर में | at home |
| रहहू | रहो | remain |
2 आयसु मोर सासु सेवकाई। सब बिधि भामिनि भवन भलाई।।
English explanation
Dear lady, obeying my instruction and serving your mother-in-law—remaining at home is good for you in every way.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| आयसु | आज्ञा | instruction |
| मोर | मेरी | my |
| सासु | सास की | of your mother-in-law |
| सेवकाई | सेवा | service |
| सब | सब | every |
| बिधि | प्रकार से | in respect |
| भामिनि | हे भामिनि, सीता | O dear lady, Sita |
| भवन | घर में रहने में | in staying at home |
| भलाई | भला या कल्याण | welfare or benefit |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.61
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 394
- सहायक विषय
- श्रीसीता-राम-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 394, 395
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।