अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
एहि ते अधिक धरमु नहिं दूजा। सादर सासु ससुर पद पूजा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दआदरपूर्वक सास-ससुरके चरणोंकी पूजा (सेवा) करनेसे बढ़कर दूसरा कोई धर्म नहीं है। जब-जब माता मुझे याद करेंगी और प्रेमसे व्याकुल होनेके कारण उनकी बुद्धि भोली हो जायगी (वे अपने-आपको भूल जायँगी),॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 394 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
एहि ते अधिक धरमु नहिं दूजा। सादर सासु ससुर पद पूजा।।
जब जब मातु करिहि सुधि मोरी। होइहि प्रेम बिकल मति भोरी।।
स्रोत अभिलेख 2.61 · पुस्तक पृ. 394, 395
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 एहि ते अधिक धरमु नहिं दूजा। सादर सासु ससुर पद पूजा।।
English explanation
There is no higher duty than reverently honoring the feet of one's mother-in-law and father-in-law.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एहि | इससे, इस सेवा से | this, this service |
| ते | से | than |
| अधिक | बढ़कर | greater |
| धरमु | धर्म या कर्तव्य | religious duty |
| नहिं | नहीं है | there is no |
| दूजा | दूसरा | other |
| सादर | आदरपूर्वक | reverently |
| सासु | सास | mother-in-law |
| ससुर | ससुर | father-in-law |
| पद | चरणों की | of the feet |
| पूजा | पूजा या आदरपूर्ण सेवा | worship or reverent service |
2 जब जब मातु करिहि सुधि मोरी। होइहि प्रेम बिकल मति भोरी।।
English explanation
Whenever Mother remembers me, her innocent heart will become overwhelmed with love.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जब | जब | when |
| जब | जब भी | whenever |
| मातु | माता कौसल्या | Mother Kausalya |
| करिहि | करेंगी | will take |
| सुधि | याद | remembrance |
| मोरी | मेरी | of me |
| होइहि | हो जाएगी | will become |
| प्रेम | प्रेम से | with love |
| बिकल | व्याकुल | overwhelmed |
| मति | मन या बुद्धि | heart or mind |
| भोरी | भोली या सरल | innocent or guileless |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.61
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 394
- सहायक विषय
- श्रीसीता-राम-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 394, 395
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।