अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मातु सचिव गुर पुर नर नारी। सकल सनेहँ बिकल भए भारी।।
मूल पाठ
मातु सचिव गुर पुर नर नारी। सकल सनेहँ बिकल भए भारी।।
भरतहि कहहि सराहि सराही। राम प्रेम मूरति तनु आही।।
स्रोत अभिलेख 2.184 · पुस्तक पृ. 495, 496
भावार्थ
मूल पाठ के बादमाता, मन्त्री, गुरु, नगरके स्त्री-पुरुष सभी स्नेहके कारण बहुत ही व्याकुल हो गये। सब भरतजीको सराह-सराहकर कहते हैं कि आपका शरीर श्रीरामप्रेमकी साक्षात् मूॢत ही है॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 496 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 मातु सचिव गुर पुर नर नारी। सकल सनेहँ बिकल भए भारी।।
English explanation
The mothers, ministers, guru, and the city’s men and women all became deeply overwhelmed with affection.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मातु | माताएँ | the mothers |
| सचिव | मंत्री | ministers |
| गुर | गुरु | the preceptor |
| पुर | नगर के | of the city |
| नर | पुरुष | men |
| नारी | स्त्रियाँ | women |
| सकल | सभी | all |
| सनेहँ | प्रेम से | with affection |
| बिकल | व्याकुल | overwhelmed |
| भए | हो गए | became |
| भारी | अत्यंत | deeply |
2 भरतहि कहहि सराहि सराही। राम प्रेम मूरति तनु आही।।
English explanation
Praising Bharata again and again, they say, ‘His bodily form is the embodiment of love for Rama.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भरतहि | भरत को; भरत के विषय में | to Bharata; of Bharata |
| कहहि | कहते हैं | they say |
| सराहि | प्रशंसा करके | praising |
| सराही | फिर प्रशंसा करके | praising again |
| राम | राम के प्रति | for Rama |
| प्रेम | प्रेम की | of love |
| मूरति | मूर्ति; साकार रूप | embodiment |
| तनु | शरीर; देहधारी रूप | body; bodily form |
| आही | है | is |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.184
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 496
- सहायक विषय
- वसिष्ठ-भरत-संवाद, श्रीरामजीको लानेके लिये चित्रकूट जानेकी तैयारी
- मुद्रित पृष्ठ
- 495, 496
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