अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
भरत बचन सब कहँ प्रिय लागे। राम सनेह सुधाँ जनु पागे।।
मूल पाठ
भरत बचन सब कहँ प्रिय लागे। राम सनेह सुधाँ जनु पागे।।
लोग बियोग बिषम बिष दागे। मंत्र सबीज सुनत जनु जागे।।
स्रोत अभिलेख 2.184 · पुस्तक पृ. 495, 496
भावार्थ
मूल पाठ के बादभरतजीके वचन सबको प्यारे लगे। मानो वे श्रीरामजीके प्रेमरूपी अमृतमें पगे हुए थे। श्रीरामवियोगरूपी भीषण विषसे सब लोग जले हुए थे। वे मानो बीजसहित मन्त्रको सुनते ही जाग उठे॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 495 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 भरत बचन सब कहँ प्रिय लागे। राम सनेह सुधाँ जनु पागे।।
English explanation
Bharata’s words pleased everyone, as though steeped in the nectar of love for Rama.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भरत | भरत के | Bharata’s, Rama’s brother |
| बचन | वचन | words |
| सब | सभी | everyone |
| कहँ | को | to |
| प्रिय | प्रिय; अच्छे | dear; pleasing |
| लागे | लगे | seemed |
| राम | राम के प्रति | for Rama |
| सनेह | प्रेम | love |
| सुधाँ | अमृत में | in nectar |
| जनु | मानो | as though |
| पागे | पगे; सराबोर हुए | steeped; saturated |
2 लोग बियोग बिषम बिष दागे। मंत्र सबीज सुनत जनु जागे।।
English explanation
The people, afflicted by separation’s terrible poison, seemed to revive on hearing a mantra endowed with its seed syllables.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लोग | लोग | the people |
| बियोग | वियोग का | of separation |
| बिषम | भयंकर | terrible |
| बिष | विष से | by poison |
| दागे | संतप्त; झुलसे हुए | afflicted; scorched |
| मंत्र | मंत्र | a mantra |
| सबीज | बीजाक्षरों सहित | with its seed syllables |
| सुनत | सुनते ही | upon hearing |
| जनु | मानो | as though |
| जागे | जाग उठे; चेतना में लौटे | awoke; revived |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.184
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 495
- सहायक विषय
- वसिष्ठ-भरत-संवाद, श्रीरामजीको लानेके लिये चित्रकूट जानेकी तैयारी
- मुद्रित पृष्ठ
- 495, 496
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