अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मातु मंदि मैं साधु सुचाली। उर अस आनत कोटि कुचाली।।
मूल पाठ
मातु मंदि मैं साधु सुचाली। उर अस आनत कोटि कुचाली।।
फरइ कि कोदव बालि सुसाली। मुकुता प्रसव कि संबुक काली।।
स्रोत अभिलेख 2.261 · पुस्तक पृ. 561, 562
भावार्थ
मूल पाठ के बादमाता नीच है और मैं सदाचारी और साधु हूँ, ऐसा हृदयमें लाना ही करोड़ दुराचारोंके समान है। क्या कोदोंकी बाली उत्तम धान फल सकती है? क्या काली घोंघी मोती उत्पन्न कर सकती है?॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 561 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 मातु मंदि मैं साधु सुचाली। उर अस आनत कोटि कुचाली।।
English explanation
To entertain the thought, ‘My mother is bad, while I am virtuous and upright,’ is itself tantamount to countless acts of misconduct.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मातु | माता | my mother |
| मंदि | बुरी | bad |
| मैं | मैं | I |
| साधु | सज्जन | virtuous |
| सुचाली | अच्छे आचरण वाला | upright in conduct |
| उर | हृदय में | in the heart |
| अस | ऐसा विचार | such a thought |
| आनत | लाते ही | on entertaining |
| कोटि | करोड़ों | millions of |
| कुचाली | बुरे आचरण | acts of misconduct |
2 फरइ कि कोदव बालि सुसाली। मुकुता प्रसव कि संबुक काली।।
English explanation
Does an ear of coarse millet yield fine rice? Does a black snail produce pearls?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| फरइ | फलता है | bears fruit |
| कि | क्या | does |
| कोदव | कोदो नामक मोटा अनाज | coarse kodo millet |
| बालि | की बाली | its grain ear |
| सुसाली | उत्तम धान | fine rice |
| मुकुता | मोती | pearls |
| प्रसव | उत्पन्न करती है | produces |
| कि | क्या | does |
| संबुक | घोंघी | a snail |
| काली | काली | black |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.261
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 561
- सहायक विषय
- श्रीराम-भरतादिका संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 561, 562
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।