अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बिधि न सकेउ सहि मोर दुलारा। नीच बीचु जननी मिस पारा।
मूल पाठ
बिधि न सकेउ सहि मोर दुलारा। नीच बीचु जननी मिस पारा।
यहउ कहत मोहि आजु न सोभा। अपनीं समुझि साधु सुचि को भा।।
स्रोत अभिलेख 2.261 · पुस्तक पृ. 561, 562
भावार्थ
मूल पाठ के बादपरन्तु विधाता मेरा दुलार न सह सका। उसने नीच माताके बहाने [मेरे और स्वामीके बीच] अन्तर डाल दिया। यह भी कहना आज मुझे शोभा नहीं देता। क्योंकि अपनी समझसे कौन साधु और पवित्र हुआ है? (जिसको दूसरे साधु और पवित्र मानें, वही साधु है)॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 561 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 बिधि न सकेउ सहि मोर दुलारा। नीच बीचु जननी मिस पारा।
English explanation
AI draft: Fate could not bear the affection I received; that base one placed an obstacle between us, using my mother as the pretext.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिधि | विधाता | Fate, the creator |
| न | नहीं | not |
| सकेउ | सक सका | was able |
| सहि | सहन करना | to bear |
| मोर | मेरा | my |
| दुलारा | मुझे मिलने वाला दुलार | the affection bestowed on me |
| नीच | उस नीच विधाता ने | that base Fate |
| बीचु | बीच में बाधा | an intervening obstacle |
| जननी | माता कैकेयी | my mother Kaikeyi |
| मिस | के बहाने | under the pretext of |
| पारा | डाल दी | placed |
2 यहउ कहत मोहि आजु न सोभा। अपनीं समुझि साधु सुचि को भा।।
English explanation
Even saying this does not befit me today. Who has not considered himself virtuous and pure in his own judgment?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| यहउ | यह भी | even this |
| कहत | कहना | saying |
| मोहि | मुझे | to me |
| आजु | आज | today |
| न | नहीं | not |
| सोभा | शोभा देता | is fitting |
| अपनीं | अपनी ही | one's own |
| समुझि | समझ में | in judgment |
| साधु | सज्जन | virtuous |
| सुचि | पवित्र | pure |
| को | कौन | who |
| भा | हुआ | has become |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.261
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 561
- सहायक विषय
- श्रीराम-भरतादिका संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 561, 562
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।