अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मागहु बिदा मातु सन जाई। आवहु बेगि चलहु बन भाई।।
मूल पाठ
मागहु बिदा मातु सन जाई। आवहु बेगि चलहु बन भाई।।
मुदित भए सुनि रघुबर बानी। भयउ लाभ बड़ गइ बड़ि हानी।।
स्रोत अभिलेख 2.73 · पुस्तक पृ. 403, 404
भावार्थ
मूल पाठ के बाद[और कहा—] हे भाई! जाकर मातासे विदा माँग आओ और जल्दी वनको चलो! रघुकुलमें श्रेष्ठ श्रीरामजीकी वाणी सुनकर लक्ष्मणजी आनन्दित हो गये। बड़ी हानि दूर हो गयी और बड़ा लाभ हुआ!॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 403 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 मागहु बिदा मातु सन जाई। आवहु बेगि चलहु बन भाई।।
English explanation
AI draft: Rama said, “Brother, go and ask your mother’s leave; return quickly and come to the forest.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मागहु | माँगो | ask for |
| बिदा | जाने की अनुमति | leave to depart |
| मातु | माता सुमित्रा | your mother Sumitra |
| सन | से | from |
| जाई | जाकर | having gone |
| आवहु | आओ; लौट आओ | come back |
| बेगि | शीघ्र | quickly |
| चलहु | चलो | come along |
| बन | वन में | to the forest |
| भाई | हे भाई लक्ष्मण | O brother Lakshmana |
2 मुदित भए सुनि रघुबर बानी। भयउ लाभ बड़ गइ बड़ि हानी।।
English explanation
Hearing Rama’s words, Lakshmana rejoiced: a great gain was secured and a great loss averted.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मुदित | प्रसन्न | delighted |
| भए | हुए | became |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| रघुबर | रघुवंश में श्रेष्ठ राम की | of Rama, foremost of Raghu’s lineage |
| बानी | वाणी; वचन | words |
| भयउ | हुआ | came about |
| लाभ | लाभ | gain |
| बड़ | बड़ा | great |
| गइ | दूर हो गई | was averted |
| बड़ि | बड़ी | great |
| हानी | हानि | loss |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.73
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 403
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 403, 404
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।