अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मंजु बिलोचन मोचति बारी। बोली देखि राम महतारी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दसीताजी सुन्दर नेत्रोंसे जल बहा रही हैं। उनकी यह दशा देखकर श्रीरामजीकी माता कौसल्याजी बोलीं—हे तात! सुनो, सीता अत्यन्त ही सुकुमारी हैं तथा सास, ससुर और कुटुम्बी सभीको प्यारी हैं॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 392 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
मंजु बिलोचन मोचति बारी। बोली देखि राम महतारी।।
तात सुनहु सिय अति सुकुमारी। सासु ससुर परिजनहि पिआरी।।
स्रोत अभिलेख 2.58 · पुस्तक पृ. 392, 392
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 मंजु बिलोचन मोचति बारी। बोली देखि राम महतारी।।
English explanation
Sita was shedding tears from her lovely eyes. Seeing this, Rama’s mother spoke.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मंजु | सुंदर | lovely |
| बिलोचन | नेत्रों से | from her eyes |
| मोचति | बहा रही थीं | was shedding |
| बारी | आँसू | tears |
| बोली | बोलीं | spoke |
| देखि | देखकर | seeing this |
| राम | राम की | Rama’s |
| महतारी | माता कौसल्या | mother, Kausalya |
2 तात सुनहु सिय अति सुकुमारी। सासु ससुर परिजनहि पिआरी।।
English explanation
Son, listen: Sita is very delicate and dear to her mother-in-law, father-in-law, and the family.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तात | बेटा | dear son |
| सुनहु | सुनो | listen |
| सिय | सीता | Sita |
| अति | अत्यंत | very |
| सुकुमारी | कोमल | delicate |
| सासु | सास को | to her mother-in-law |
| ससुर | ससुर को | to her father-in-law |
| परिजनहि | परिवार के लोगों को | to the family members |
| पिआरी | प्रिय | dear |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.58
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 392
- सहायक विषय
- श्रीराम-कौसल्या-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 392, 392
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।