अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
चारु चरन नख लेखति धरनी। नूपुर मुखर मधुर कबि बरनी।।
मूल पाठ
चारु चरन नख लेखति धरनी। नूपुर मुखर मधुर कबि बरनी।।
मनहुँ प्रेम बस बिनती करहीं। हमहि सीय पद जनि परिहरहीं।।
स्रोत अभिलेख 2.58 · पुस्तक पृ. 392, 392
भावार्थ
मूल पाठ के बादसीताजी अपने सुन्दर चरणोंके नखोंसे धरती कुरेद रही हैं। ऐसा करते समय नूपुरोंका जो मधुर शब्द हो रहा है, कवि उसका इस प्रकार वर्णन करते हैं कि मानो प्रेमके वश होकर नूपुर यह विनती कर रहे हैं कि सीताजीके चरण कभी हमारा त्याग न करें॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 392 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 चारु चरन नख लेखति धरनी। नूपुर मुखर मधुर कबि बरनी।।
English explanation
Sita traced lines on the ground with the nails of her lovely feet. The poet portrays her anklets as speaking in sweet tones.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चारु | सुंदर | lovely |
| चरन | चरणों के | of her feet |
| नख | नखों से | with the nails |
| लेखति | रेखाएँ खींच रही थीं | was tracing lines |
| धरनी | धरती पर | on the ground |
| नूपुर | पायलें | anklets |
| मुखर | बोलते, बजते हुए | vocal; sounding |
| मधुर | मधुर स्वर वाले | sweet-toned |
| कबि | कवि ने | the poet |
| बरनी | वर्णन किया | described |
2 मनहुँ प्रेम बस बिनती करहीं। हमहि सीय पद जनि परिहरहीं।।
English explanation
It was as though the anklets, moved by love, were pleading: ‘May Sita’s feet not abandon us.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मनहुँ | मानो | as though |
| प्रेम | प्रेम के | by love |
| बस | वश में | under the sway of |
| बिनती | विनती | a plea |
| करहीं | कर रहे हों | were making |
| हमहि | हमें | us |
| सीय | सीता के | Sita’s |
| पद | चरण | feet |
| जनि | न, मत | not |
| परिहरहीं | त्यागें, छोड़ें | abandon |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.58
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 392
- सहायक विषय
- श्रीराम-कौसल्या-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 392, 392
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।