अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
चलन चहत बन जीवननाथू। केहि सुकृती सन होइहि साथू।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दजीवननाथ (प्राणनाथ) वनको चलना चाहते हैं। देखें किस पुण्यवान्से उनका साथ होगा— शरीर और प्राण दोनों साथ जायँगे या केवल प्राणहीसे इनका साथ होगा? विधाताकी करनी कुछ जानी नहीं जाती॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 392 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
चलन चहत बन जीवननाथू। केहि सुकृती सन होइहि साथू।।
की तनु प्रान कि केवल प्राना। बिधि करतबु कछु जाइ न जाना।।
स्रोत अभिलेख 2.58 · पुस्तक पृ. 392, 392
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 चलन चहत बन जीवननाथू। केहि सुकृती सन होइहि साथू।।
English explanation
The lord of my life wishes to go to the forest; which fortunate, virtuous one will accompany him?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चलन | जाना | to go |
| चहत | चाहते हैं | wishes |
| बन | वन में | to the forest |
| जीवननाथू | जीवन के स्वामी राम | Rama, the lord of her life |
| केहि | किस | which |
| सुकृती | पुण्यवान को | fortunate, virtuous one |
| सन | के साथ | with |
| होइहि | होगा | will be |
| साथू | साथ, संग | companionship |
2 की तनु प्रान कि केवल प्राना। बिधि करतबु कछु जाइ न जाना।।
English explanation
Will both my body and my life go with him, or only my life? There is no knowing what the Creator has ordained.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| की | क्या | whether |
| तनु | शरीर | body |
| प्रान | और प्राण | and life |
| कि | या | or |
| केवल | केवल | only |
| प्राना | प्राण | life |
| बिधि | विधाता का | the Creator’s |
| करतबु | विधान, कार्य | decree; workings |
| कछु | कुछ भी | anything |
| जाइ | जा सकता | can be |
| न | नहीं | not |
| जाना | जाना, समझा | known; understood |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.58
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 392
- सहायक विषय
- श्रीराम-कौसल्या-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 392, 392
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।