अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
दीन्हि असीस सासु मृदु बानी। अति सुकुमारि देखि अकुलानी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दसासने कोमल वाणीसे आशीर्वाद दिया। वे सीताजीको अत्यन्त सुकुमारी देखकर व्याकुल हो उठीं। रूपकी राशि और पतिके साथ पवित्र प्रेम करनेवाली सीताजी नीचा मुख किये बैठी सोच रही हैं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 392 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
दीन्हि असीस सासु मृदु बानी। अति सुकुमारि देखि अकुलानी।।
बैठि नमितमुख सोचति सीता। रूप रासि पति प्रेम पुनीता।।
स्रोत अभिलेख 2.58 · पुस्तक पृ. 392, 392
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 दीन्हि असीस सासु मृदु बानी। अति सुकुमारि देखि अकुलानी।।
English explanation
Her mother-in-law blessed her in gentle words and grew distressed on seeing how very delicate Sita was.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| दीन्हि | दिया | gave |
| असीस | आशीर्वाद | a blessing |
| सासु | सास, कौसल्या | her mother-in-law, Kausalya |
| मृदु | कोमल | gentle |
| बानी | वाणी में | in speech |
| अति | अत्यंत | very |
| सुकुमारि | कोमल सीता को | delicate Sita |
| देखि | देखकर | seeing |
| अकुलानी | व्याकुल हो गईं | became distressed |
2 बैठि नमितमुख सोचति सीता। रूप रासि पति प्रेम पुनीता।।
English explanation
Sita, an embodiment of beauty and sanctified by love for her husband, sat with her head bowed, pondering.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बैठि | बैठकर | sitting |
| नमितमुख | मुख झुकाए हुए | with her face bowed |
| सोचति | सोच रही थीं | was pondering |
| सीता | राम की पत्नी सीता | Sita, Rama’s wife |
| रूप | सौंदर्य की | of beauty |
| रासि | राशि, भंडार | an abundance; embodiment |
| पति | पति के प्रति | for her husband |
| प्रेम | प्रेम से | through love |
| पुनीता | पवित्र | sanctified |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.58
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 392
- सहायक विषय
- श्रीराम-कौसल्या-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 392, 392
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।