अयोध्याकाण्ड · दोहा 57 · दोहा/सोरठा
समाचार तेहि समय सुनि सीय उठी अकुलाइ।
समाचार तेहि समय सुनि सीय उठी अकुलाइ।
जाइ सासु पद कमल जुग बंदि बैठि सिरु नाइ।।57।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.57 · पुस्तक पृ. 391, 391
भावार्थ और शब्दार्थ
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1समाचार तेहि समय सुनि सीय उठी अकुलाइ।
उसी समय समाचार सुनकर सीता व्याकुल होकर उठीं।
English explanation
Hearing the news at that moment, Sita rose in distress.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| समाचार | समाचार | the news |
| तेहि | उस | that |
| समय | समय | time; moment |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| सीय | सीता, राम की पत्नी | Sita, Rama's wife |
| उठी | उठीं | rose |
| अकुलाइ | व्याकुल होकर | in distress |
2 जाइ सासु पद कमल जुग बंदि बैठि सिरु नाइ।।57।।
सीता जाकर अपनी सास के दोनों चरण-कमलों को प्रणाम करके सिर झुकाए बैठ गईं।
English explanation
Sita went to her mother-in-law, bowed to her two lotus-like feet, and sat with her head lowered.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जाइ | जाकर | having gone |
| सासु | सास के | of her mother-in-law |
| पद | चरण | feet |
| कमल | कमल-समान | lotus-like |
| जुग | दोनों; जोड़ा | both; pair |
| बंदि | प्रणाम करके | having paid reverence |
| बैठि | बैठ गईं | sat down |
| सिरु | सिर | head |
| नाइ | झुकाकर | having bowed |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 57
- स्रोत अभिलेख
- 2.57
- सहायक विषय
- श्रीराम-कौसल्या-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 391, 391
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