अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
भोग रोगसम भूषन भारू। जम जातना सरिस संसारू।।
मूल पाठ
भोग रोगसम भूषन भारू। जम जातना सरिस संसारू।।
प्राननाथ तुम्ह बिनु जग माहीं। मो कहुँ सुखद कतहुँ कछु नाहीं।।
स्रोत अभिलेख 2.65 · पुस्तक पृ. 397, 398
भावार्थ
मूल पाठ के बादभोग रोगके समान हैं, गहने भाररूप हैं और संसार यम-यातना (नरककी पीड़ा) के समान है। हे प्राणनाथ! आपके बिना जगत्में मुझे कहीं कुछ भी सुखदायी नहीं है॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 397 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 भोग रोगसम भूषन भारू। जम जातना सरिस संसारू।।
English explanation
Without one's husband, pleasures are like illness, ornaments a burden, and worldly life like the torments of Yama.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भोग | भोग-सुख | sensual pleasures |
| रोगसम | रोग के समान | like illness |
| भूषन | आभूषण | ornaments |
| भारू | बोझ | a burden |
| जम | यम की | of Yama, lord of death |
| जातना | यातना | torment |
| सरिस | के समान | like |
| संसारू | संसार; सांसारिक जीवन | worldly life |
2 प्राननाथ तुम्ह बिनु जग माहीं। मो कहुँ सुखद कतहुँ कछु नाहीं।।
English explanation
Beloved lord of my life, without you nothing anywhere in the world brings me happiness.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्राननाथ | हे प्राणों के प्रिय स्वामी | beloved lord of my life |
| तुम्ह | आप | you |
| बिनु | बिना | without |
| जग | जगत | the world |
| माहीं | में | in |
| मो | मुझ | me |
| कहुँ | के लिए | for |
| सुखद | सुख देने वाला | bringing happiness |
| कतहुँ | कहीं भी | anywhere |
| कछु | कुछ भी | anything |
| नाहीं | नहीं है | is not |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.65
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 397
- सहायक विषय
- श्रीसीता-राम-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 397, 398
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।