अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जहँ लगि नाथ नेह अरु नाते। पिय बिनु तियहि तरनिहु ते ताते।।
मूल पाठ
जहँ लगि नाथ नेह अरु नाते। पिय बिनु तियहि तरनिहु ते ताते।।
तनु धनु धामु धरनि पुर राजू। पति बिहीन सबु सोक समाजू।।
स्रोत अभिलेख 2.65 · पुस्तक पृ. 397, 398
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे नाथ! जहाँतक स्नेह और नाते हैं, पतिके बिना स्त्रीको सभी सूर्यसे भी बढ़कर तपानेवाले हैं। शरीर, धन, घर, पृथ्वी, नगर और राज्य, पतिके बिना स्त्रीके लिये यह सब शोकका समाज है॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 397 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 जहँ लगि नाथ नेह अरु नाते। पिय बिनु तियहि तरनिहु ते ताते।।
English explanation
My lord, all bonds of affection and kinship are, for a woman without her husband, more scorching than even the sun.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जहँ | जहाँ तक; जितने भी | wherever; all that |
| लगि | तक | as far as |
| नाथ | हे नाथ | my lord |
| नेह | स्नेह | affection |
| अरु | और | and |
| नाते | रिश्ते | kinship ties |
| पिय | प्रिय पति | beloved husband |
| बिनु | बिना | without |
| तियहि | स्त्री के लिए | for a woman |
| तरनिहु | सूर्य भी | even the sun |
| ते | से | than |
| ताते | अधिक तपाने वाले | more scorching |
2 तनु धनु धामु धरनि पुर राजू। पति बिहीन सबु सोक समाजू।।
English explanation
Body, wealth, home, land, city, and kingdom—all are a collection of sorrows without one's husband.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तनु | शरीर | body |
| धनु | धन | wealth |
| धामु | घर | home |
| धरनि | भूमि | land |
| पुर | नगर | city |
| राजू | राज्य | kingdom |
| पति | पति | husband |
| बिहीन | से रहित | without |
| सबु | सब | all |
| सोक | शोक का | of sorrow |
| समाजू | समूह | collection |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.65
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 397
- सहायक विषय
- श्रीसीता-राम-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 397, 398
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।