अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
भूपति राम सपथ जब करई। तब मागेहु जेहिं बचनु न टरई।।
मूल पाठ
भूपति राम सपथ जब करई। तब मागेहु जेहिं बचनु न टरई।।
होइ अकाजु आजु निसि बीतें। बचनु मोर प्रिय मानेहु जी तें।।
स्रोत अभिलेख 2.22 · पुस्तक पृ. 361, 362
भावार्थ
मूल पाठ के बादजब राजा रामकी सौगंध खा लें, तब वर माँगना, जिससे वचन न टलने पावे। आजकी रात बीत गयी, तो काम बिगड़ जायगा। मेरी बातको हृदयसे प्रिय [या प्राणोंसे भी प्यारी] समझना॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 362 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 भूपति राम सपथ जब करई। तब मागेहु जेहिं बचनु न टरई।।
English explanation
‘When the king swears by Rama, ask for the boons, so that he cannot go back on his word.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भूपति | राजा दशरथ | King Dasharatha |
| राम | राम की | by Rama |
| सपथ | शपथ | an oath |
| जब | जब | when |
| करई | लें | takes |
| तब | तब | then |
| मागेहु | माँगना | ask for the boons |
| जेहिं | जिससे | so that |
| बचनु | वचन से | from his word |
| न | नहीं | not |
| टरई | हटें; मुकरें | backs away; reneges |
2 होइ अकाजु आजु निसि बीतें। बचनु मोर प्रिय मानेहु जी तें।।
English explanation
‘Once tonight has passed, the plan will fail; regard my words as well-meant and accept them wholeheartedly.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| होइ | हो जाएगा | will occur |
| अकाजु | काम का बिगाड़ | failure of the plan |
| आजु | आज की | tonight’s |
| निसि | रात | night |
| बीतें | बीत जाने पर | after it has passed |
| बचनु | बात | words; advice |
| मोर | मेरी | my |
| प्रिय | प्रिय; हितकारी | dear; well-meant |
| मानेहु | मानना; स्वीकार करना | accept; heed |
| जी | मन | heart |
| तें | से | with; from |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.22
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 362
- सहायक विषय
- सरस्वतीका मन्थराकी बुद्धि फेरना, कैकेयी-मन्थरा-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 361, 362
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