अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
दुइ बरदान भूप सन थाती। मागहु आजु जुड़ावहु छाती।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दतुम्हारे दो वरदान राजाके पास धरोहर हैं। आज उन्हें राजासे माँगकर अपनी छाती ठंढी करो। पुत्रको राज्य और रामको वनवास दो और सौतका सारा आनन्द तुम ले लो॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 362 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
दुइ बरदान भूप सन थाती। मागहु आजु जुड़ावहु छाती।।
सुतहि राजु रामहि बनवासू। देहु लेहु सब सवति हुलासु।।
स्रोत अभिलेख 2.22 · पुस्तक पृ. 361, 362
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 दुइ बरदान भूप सन थाती। मागहु आजु जुड़ावहु छाती।।
English explanation
‘Your two boons are held in trust by the king; claim them today and soothe your heart.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| दुइ | दो | two |
| बरदान | वरदान | boons |
| भूप | राजा दशरथ | King Dasharatha |
| सन | के पास | with |
| थाती | धरोहर के रूप में रखे हैं | are held in trust |
| मागहु | माँगो | ask for them |
| आजु | आज | today |
| जुड़ावहु | शीतल करो; तसल्ली दो | soothe; bring relief to |
| छाती | अपना हृदय | your heart |
2 सुतहि राजु रामहि बनवासू। देहु लेहु सब सवति हुलासु।।
English explanation
‘Have the kingdom given to your son Bharata and forest exile to Rama; thus take away all your co-wife’s joy.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुतहि | अपने पुत्र भरत को | to your son Bharata |
| राजु | राज्य | the kingdom |
| रामहि | राम को | to Rama |
| बनवासू | वनवास | forest exile |
| देहु | दो; दिलाओ | give; have granted |
| लेहु | ले लो; छीन लो | take away |
| सब | सारा | all |
| सवति | सौत कौसल्या का | of your co-wife Kaushalya |
| हुलासु | आनंद | joy |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.22
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 362
- सहायक विषय
- सरस्वतीका मन्थराकी बुद्धि फेरना, कैकेयी-मन्थरा-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 361, 362
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