अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनत बात मृदु अंत कठोरी। देति मनहुँ मधु माहुर घोरी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दमन्थराकी बातें सुननेमें तो कोमल हैं, पर परिणाममें कठोर (भयानक) हैं। मानो वह शहदमें घोलकर जहर पिला रही हो। दासी कहती है—हे स्वामिनि! तुमने मुझको एक कथा कही थी, उसकी याद है कि नहीं?॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 361 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सुनत बात मृदु अंत कठोरी। देति मनहुँ मधु माहुर घोरी।।
कहइ चेरि सुधि अहइ कि नाही। स्वामिनि कहिहु कथा मोहि पाहीं।।
स्रोत अभिलेख 2.22 · पुस्तक पृ. 361, 362
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सुनत बात मृदु अंत कठोरी। देति मनहुँ मधु माहुर घोरी।।
English explanation
Her words sound gentle but are harsh in their outcome, as though she were serving honey mixed with poison.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनत | सुनने में | when heard |
| बात | बातें | words |
| मृदु | कोमल | gentle |
| अंत | परिणाम में | in their outcome |
| कठोरी | कठोर | harsh |
| देति | देती है | she gives |
| मनहुँ | मानो | as though |
| मधु | शहद में | in honey |
| माहुर | विष | poison |
| घोरी | घोलकर | having mixed |
2 कहइ चेरि सुधि अहइ कि नाही। स्वामिनि कहिहु कथा मोहि पाहीं।।
English explanation
The maid says, ‘My lady, do you remember or not? Tell me about it.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहइ | कहती है | says |
| चेरि | दासी मंथरा | the maid Manthara |
| सुधि | स्मरण | recollection |
| अहइ | है | is there |
| कि | या | or |
| नाही | नहीं | not |
| स्वामिनि | हे स्वामिनी | my lady |
| कहिहु | बताइए | please tell |
| कथा | वह बात | that matter |
| मोहि | मेरे | me |
| पाहीं | पास; मुझसे | to; addressing me |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.22
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 361
- सहायक विषय
- सरस्वतीका मन्थराकी बुद्धि फेरना, कैकेयी-मन्थरा-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 361, 362
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