अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कुबरीं करि कबुली कैकेई। कपट छुरी उर पाहन टेई।।
मूल पाठ
कुबरीं करि कबुली कैकेई। कपट छुरी उर पाहन टेई।।
लखइ न रानि निकट दुखु कैंसे। चरइ हरित तिन बलिपसु जैसें।।
स्रोत अभिलेख 2.22 · पुस्तक पृ. 361, 362
भावार्थ
मूल पाठ के बादकुबरीने कैकेयीको [सब तरहसे] कबूल करवाकर (अर्थात् बलिपशु बनाकर) कपटरूप छुरीको अपने [कठोर] हृदयरूपी पत्थरपर टेया (उसकी धारको तेज किया)। रानी कैकेयी अपने निकटके (शीघ्र आनेवाले) दु:खको कैसे नहीं देखती, जैसे बलिका पशु हरी-हरी घास चरता है [पर यह नहीं जानता कि मौत सिरपर नाच रही है]॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 361 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 कुबरीं करि कबुली कैकेई। कपट छुरी उर पाहन टेई।।
English explanation
AI-draft meaning: The hunchbacked Manthara made Kaikeyi a whetstone and sharpened the knife of deceit on the stone of her heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कुबरीं | कुबड़ी मंथरा ने | the hunchbacked Manthara |
| करि | बनाकर | having made |
| कबुली | सान; धार तेज करने का साधन | a whetstone |
| कैकेई | रानी कैकेयी को | Queen Kaikeyi |
| कपट | छल की | of deceit |
| छुरी | छुरी | knife |
| उर | हृदय रूपी | the heart as |
| पाहन | पत्थर पर | a stone, upon it |
| टेई | धार तेज की | sharpened |
2 लखइ न रानि निकट दुखु कैंसे। चरइ हरित तिन बलिपसु जैसें।।
English explanation
How the queen fails to see the sorrow close at hand—like a sacrificial animal grazing on green grass.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लखइ | देखती या पहचानती है | sees or recognizes |
| न | नहीं | not |
| रानि | रानी कैकेयी | Queen Kaikeyi |
| निकट | पास आया हुआ | close at hand |
| दुखु | दुःख | sorrow |
| कैंसे | कैसे | how |
| चरइ | चरता है | grazes on |
| हरित | हरी | green |
| तिन | घास | grass |
| बलिपसु | बलि के लिए रखा पशु | an animal meant for sacrifice |
| जैसें | जैसे | just as |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.22
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 361
- सहायक विषय
- सरस्वतीका मन्थराकी बुद्धि फेरना, कैकेयी-मन्थरा-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 361, 362
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।