अयोध्याकाण्ड · दोहा 21 · दोहा/सोरठा
परउँ कूप तुअ बचन पर सकउँ पूत पति त्यागि।
परउँ कूप तुअ बचन पर सकउँ पूत पति त्यागि।
कहसि मोर दुखु देखि बड़ कस न करब हित लागि।।21।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.21 · पुस्तक पृ. 360, 361
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1परउँ कूप तुअ बचन पर सकउँ पूत पति त्यागि।
तुम्हारे कहने पर मैं कुएँ में गिर पड़ूँ; पुत्र और पति को भी त्याग सकती हूँ।
English explanation
At your word I would throw myself into a well; I could even abandon my son and husband.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| परउँ | मैं गिर पड़ूँ | I would fall; throw myself |
| कूप | कुएँ में | into a well |
| तुअ | तुम्हारे | your |
| बचन | वचन; कहने | word; bidding |
| पर | पर | at; upon |
| सकउँ | मैं सकती हूँ | I can |
| पूत | पुत्र को | my son |
| पति | पति को | my husband |
| त्यागि | त्याग देना | abandon |
2 कहसि मोर दुखु देखि बड़ कस न करब हित लागि।।21।।
तुम मेरा बड़ा दुःख देखकर कह रही हो; अपने हित के लिए मैं तुम्हारी बात क्यों न मानूँ?
English explanation
You speak on seeing my great distress; why would I not act on your advice for my own good?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहसि | तुम कहती हो | you say; advise |
| मोर | मेरा | my |
| दुखु | दुःख | distress |
| देखि | देखकर | seeing |
| बड़ | बड़ा; गहरा | great; deep |
| कस | क्यों | why |
| न | नहीं | not |
| करब | मैं करूँगी; बात मानूँगी | I will act; follow the advice |
| हित | अपने हित के | my own welfare |
| लागि | लिए | for the sake of |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 21
- स्रोत अभिलेख
- 2.21
- सहायक विषय
- सरस्वतीका मन्थराकी बुद्धि फेरना, कैकेयी-मन्थरा-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 360, 361
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