अयोध्याकाण्ड · दोहा 22 · दोहा/सोरठा
बड़ कुघातु करि पातकिनि कहेसि कोपगृहँ जाहु।
बड़ कुघातु करि पातकिनि कहेसि कोपगृहँ जाहु।
काजु सँवारेहु सजग सबु सहसा जनि पतिआहु।।22।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.22 · पुस्तक पृ. 361, 362
भावार्थ और शब्दार्थ
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1बड़ कुघातु करि पातकिनि कहेसि कोपगृहँ जाहु।
बड़ा अनिष्टकारी दाँव करके पापिनी मंथरा ने कहा, ‘कोपभवन में जाओ।’
English explanation
Having made a deeply harmful move, the sinful Manthara said, ‘Go to the chamber of anger.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बड़ | बड़ा | great; grave |
| कुघातु | अनिष्टकारी दाँव; बुरा प्रहार | a harmful move; a malicious blow |
| करि | करके | having made |
| पातकिनि | पापिनी मंथरा ने | the sinful Manthara |
| कहेसि | कहा | said |
| कोपगृहँ | कोपभवन में | to the chamber of anger |
| जाहु | जाओ | go |
2 काजु सँवारेहु सजग सबु सहसा जनि पतिआहु।।22।।
‘सावधान रहकर सारा काम सँभालना; तुरंत किसी बात पर विश्वास मत कर लेना।’
English explanation
‘Stay alert and see the whole plan through; do not trust anything too readily.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| काजु | काम; योजना | the undertaking; plan |
| सँवारेहु | सँभालना; सफल करना | manage; bring to success |
| सजग | सावधान रहकर | remaining alert |
| सबु | सारा | all of it |
| सहसा | तुरंत; बिना विचार किए | hastily; without reflection |
| जनि | मत | do not |
| पतिआहु | विश्वास करना | believe; trust |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 22
- स्रोत अभिलेख
- 2.22
- सहायक विषय
- सरस्वतीका मन्थराकी बुद्धि फेरना, कैकेयी-मन्थरा-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 361, 362
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