अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
भूपति भवन सुभायँ सुहावा। सुरपति सदनु न पटतर पावा।।
मूल पाठ
भूपति भवन सुभायँ सुहावा। सुरपति सदनु न पटतर पावा।।
मनिमय रचित चारु चौबारे। जनु रतिपति निज हाथ सँवारे।।
स्रोत अभिलेख 2.9 · पुस्तक पृ. 417, 418
भावार्थ
मूल पाठ के बादमहाराज दशरथजीका महल तो स्वभावसे ही सुन्दर है, इन्द्रभवन भी जिसकी समानता नहीं पा सकता। उसमें सुन्दर मणियोंके रचे चौबारे (छतके ऊपर बँगले) हैं, जिन्हें मानो रतिके पति कामदेवने अपने ही हाथों सजाकर बनाया है;॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 418 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 भूपति भवन सुभायँ सुहावा। सुरपति सदनु न पटतर पावा।।
English explanation
King Dasharatha’s palace is inherently so beautiful that even Indra’s dwelling cannot equal it.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भूपति | राजा दशरथ का | King Dasharatha’s |
| भवन | महल | palace |
| सुभायँ | स्वभावतः | by its very nature |
| सुहावा | सुंदर | beautiful |
| सुरपति | देवताओं के राजा इंद्र का | of Indra, king of the gods |
| सदनु | भवन | dwelling |
| न | नहीं | not |
| पटतर | बराबरी | equality |
| पावा | पा सकता | can attain |
2 मनिमय रचित चारु चौबारे। जनु रतिपति निज हाथ सँवारे।।
English explanation
The lovely jewel-built upper chambers seem to have been adorned by Kama, Rati’s husband, with his own hands.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मनिमय | रत्नों से बने | made of jewels |
| रचित | निर्मित | constructed |
| चारु | सुंदर | lovely |
| चौबारे | ऊपरी कक्ष | upper chambers |
| जनु | मानो | as though |
| रतिपति | रति के पति कामदेव | Kama, Rati’s husband and god of love |
| निज | अपने | his own |
| हाथ | हाथों से | with hands |
| सँवारे | सजाए हों | had adorned |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.9
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 418
- सहायक विषय
- श्रीरामका शृङ्गवेरपुर पहुँचना, निषादके द्वारा सेवा
- मुद्रित पृष्ठ
- 417, 418
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।