अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
भरत दसा तेहि अवसर कैसी। जल प्रबाहँ जल अलि गति जैसी।।
मूल पाठ
भरत दसा तेहि अवसर कैसी। जल प्रबाहँ जल अलि गति जैसी।।
देखि भरत कर सोचु सनेहू। भा निषाद तेहि समयँ बिदेहू।।
स्रोत अभिलेख 2.234 · पुस्तक पृ. 538, 539
भावार्थ
मूल पाठ के बादउस समय भरतकी दशा कैसी है? जैसी जलके प्रवाहमें जलके भौंरेकी गति होती है। भरतजीका सोच और प्रेम देखकर उस समय निषाद विदेह हो गया (देहकी सुध-बुध भूल गया)॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 538 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 भरत दसा तेहि अवसर कैसी। जल प्रबाहँ जल अलि गति जैसी।।
English explanation
What was Bharata’s condition at that moment? Like the movement of a water insect in a flowing current.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भरत | राम के भाई भरत की | of Bharata, Rama’s brother |
| दसा | दशा | condition |
| तेहि | उस | that |
| अवसर | समय | moment |
| कैसी | कैसी थी | what was it like |
| जल | पानी के | of water |
| प्रबाहँ | प्रवाह में | in the current |
| जल | जल में रहने वाला | water-dwelling |
| अलि | कीट | insect |
| गति | गति; दशा | movement; condition |
| जैसी | जैसी | like that of |
2 देखि भरत कर सोचु सनेहू। भा निषाद तेहि समयँ बिदेहू।।
English explanation
Seeing Bharata’s sorrow and love, the Nishada chief lost awareness of his body at that moment.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देखि | देखकर | seeing |
| भरत | भरत | Bharata |
| कर | का | Bharata’s |
| सोचु | शोक; चिंता | sorrow; anxiety |
| सनेहू | प्रेम | love |
| भा | हो गए | became |
| निषाद | निषादराज गुह | Guha, the Nishada chief |
| तेहि | उस | that |
| समयँ | समय में | at the moment |
| बिदेहू | देह की सुध से रहित | oblivious to his body |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.234
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 538
- सहायक विषय
- भरतजीका मन्दाकिनी-स्नान, चित्रकूटमें पहुँचना, भरतादि सबका परस्पर मिलाप, पिताका शोक और श्राद्ध
- मुद्रित पृष्ठ
- 538, 539
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