अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
भरत कहेउ सुरसरि तव रेनू। सकल सुखद सेवक सुरधेनू।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दभरतजीने कहा—हे गङ्गे! आपकी रज सबको सुख देनेवाली तथा सेवकके लिये तो कामधेनु ही है। मैं हाथ जोड़कर यही वरदान माँगता हूँ कि श्रीसीतारामजीके चरणोंमें मेरा स्वाभाविक प्रेम हो॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 507 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
भरत कहेउ सुरसरि तव रेनू। सकल सुखद सेवक सुरधेनू।।
जोरि पानि बर मागउँ एहू। सीय राम पद सहज सनेहू।।
स्रोत अभिलेख 2.197 · पुस्तक पृ. 506, 507
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 भरत कहेउ सुरसरि तव रेनू। सकल सुखद सेवक सुरधेनू।।
English explanation
Bharata said, “O Ganga, your dust bestows every happiness and is a wish-fulfilling celestial cow to your devotee.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भरत | भरत ने | Bharata |
| कहेउ | कहा | said |
| सुरसरि | हे देवताओं की नदी गंगा | O Ganga, river of the gods |
| तव | तुम्हारी | your |
| रेनू | धूल | dust |
| सकल | सभी | all |
| सुखद | सुख देने वाली | bestowing happiness |
| सेवक | सेवक के लिए | for the devotee |
| सुरधेनू | इच्छापूर्ण करने वाली दिव्य गाय | the wish-fulfilling celestial cow |
2 जोरि पानि बर मागउँ एहू। सीय राम पद सहज सनेहू।।
English explanation
“With joined hands, I ask this boon: natural love for the feet of Sita and Rama.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जोरि | जोड़कर | joining |
| पानि | हाथ | hands |
| बर | वरदान | a boon |
| मागउँ | मैं माँगता हूँ | I ask for |
| एहू | यही | this very |
| सीय | सीता के | of Sita |
| राम | राम के | of Rama |
| पद | चरणों में | for the feet |
| सहज | स्वाभाविक | natural and spontaneous |
| सनेहू | प्रेम | love |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.197
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 507
- सहायक विषय
- भरत-निषाद-मिलन और संवाद एवं भरतजीका तथा नगरवासियोंका प्रेम
- मुद्रित पृष्ठ
- 506, 507
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