अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
करहिं प्रनाम नगर नर नारी। मुदित ब्रह्ममय बारि निहारी।।
मूल पाठ
करहिं प्रनाम नगर नर नारी। मुदित ब्रह्ममय बारि निहारी।।
करि मज्जनु मागहिं कर जोरी। रामचंद्र पद प्रीति न थोरी।।
स्रोत अभिलेख 2.197 · पुस्तक पृ. 506, 507
भावार्थ
मूल पाठ के बादनगरके नर-नारी प्रणाम कर रहे हैं और गङ्गाजीके ब्रह्मरूप जलको देख-देखकर आनन्दित हो रहे हैं। गङ्गाजीमें स्नानकर हाथ जोड़कर सब यही वर माँगते हैं कि श्रीरामचन्द्रजीके चरणोंमें हमारा प्रेम कम न हो (अर्थात् बहुत अधिक हो)॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 507 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 करहिं प्रनाम नगर नर नारी। मुदित ब्रह्ममय बारि निहारी।।
English explanation
The men and women of the city bow reverently, delighted at seeing the water imbued with Brahman.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| करहिं | करते हैं | perform |
| प्रनाम | प्रणाम | reverential bows |
| नगर | नगर के | of the city |
| नर | पुरुष | men |
| नारी | स्त्रियाँ | women |
| मुदित | प्रसन्न | delighted |
| ब्रह्ममय | ब्रह्म से व्याप्त | imbued with Brahman, the absolute reality |
| बारि | जल | water |
| निहारी | देखकर | having beheld |
2 करि मज्जनु मागहिं कर जोरी। रामचंद्र पद प्रीति न थोरी।।
English explanation
After bathing, they join their hands and ask for abundant love for Ramachandra’s feet.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| करि | करके | having performed |
| मज्जनु | स्नान | bathing |
| मागहिं | माँगते हैं | ask for |
| कर | हाथ | hands |
| जोरी | जोड़कर | joining |
| रामचंद्र | भगवान रामचंद्र के | of Ramachandra, Rama |
| पद | चरणों में | for the feet |
| प्रीति | प्रेम | love |
| न | नहीं | not |
| थोरी | थोड़ा | little |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.197
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 507
- सहायक विषय
- भरत-निषाद-मिलन और संवाद एवं भरतजीका तथा नगरवासियोंका प्रेम
- मुद्रित पृष्ठ
- 506, 507
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।