अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
भरतु राम प्रिय पुनि लघु भ्राता। कस न होइ मगु मंगलदाता।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दफिर भरतजी तो श्रीरामचन्द्रजीके प्यारे तथा उनके छोटे भाई ठहरे। तब भला उनके लिये मार्ग मङ्गल (सुख) दायक कैसे न हो? सिद्ध, साधु और श्रेष्ठ मुनि ऐसा कह रहे हैं और भरतजीको देखकर हृदयमें हर्ष-लाभ करते हैं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 524 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
भरतु राम प्रिय पुनि लघु भ्राता। कस न होइ मगु मंगलदाता।।
सिद्ध साधु मुनिबर अस कहहीं। भरतहि निरखि हरषु हियँ लहहीं।।
स्रोत अभिलेख 2.217 · पुस्तक पृ. 524, 524
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 भरतु राम प्रिय पुनि लघु भ्राता। कस न होइ मगु मंगलदाता।।
English explanation
Bharata is dear to Rama and is also his younger brother; why, then, should his path not bestow blessings?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भरतु | भरत | Bharata |
| राम | राम के | to Rama |
| प्रिय | प्रिय | dear |
| पुनि | और भी | also |
| लघु | छोटे | younger |
| भ्राता | भाई | brother |
| कस | क्यों | why |
| न | न | not |
| होइ | हो | should be |
| मगु | मार्ग | path |
| मंगलदाता | मंगल देने वाला | bestowing blessings |
2 सिद्ध साधु मुनिबर अस कहहीं। भरतहि निरखि हरषु हियँ लहहीं।।
English explanation
Accomplished adepts, holy people, and eminent sages say this and feel joy in their hearts upon seeing Bharata.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सिद्ध | साधना में सिद्ध पुरुष | spiritually accomplished adepts |
| साधु | संत, साधु | holy people |
| मुनिबर | श्रेष्ठ मुनि | eminent sages |
| अस | ऐसा | thus |
| कहहीं | कहते हैं | say |
| भरतहि | भरत को | Bharata |
| निरखि | देखकर | upon seeing |
| हरषु | हर्ष | joy |
| हियँ | हृदय में | in their hearts |
| लहहीं | पाते हैं | experience |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.217
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 524
- सहायक विषय
- इन्द्र-बृहस्पति-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 524, 524
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।