अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
देखि प्रभाउ सुरेसहि सोचू। जगु भल भलेहि पोच कहुँ पोचू।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दभरतजीके [इस प्रेमके] प्रभावको देखकर देवराज इन्द्रको सोच हो गया [कि कहीं इनके प्रेमवश श्रीरामजी लौट न जायँ और हमारा बना-बनाया काम बिगड़ जाय]। संसार भलेके लिये भला और बुरेके लिये बुरा है (मनुष्य जैसा आप होता है जगत् उसे वैसा ही दीखता है)। उसने गुरु बृहस्पतिजीसे कहा—हे प्रभो! वही उपाय कीजिये जिससे श्रीरामचन्द्रजी और भरतजीकी भेंट ही न हो॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 524 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
देखि प्रभाउ सुरेसहि सोचू। जगु भल भलेहि पोच कहुँ पोचू।।
गुर सन कहेउ करिअ प्रभु सोई। रामहि भरतहि भेंट न होई।।
स्रोत अभिलेख 2.217 · पुस्तक पृ. 524, 524
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 देखि प्रभाउ सुरेसहि सोचू। जगु भल भलेहि पोच कहुँ पोचू।।
English explanation
Seeing Bharata’s influence, Indra, king of the gods, grew anxious; the world is good to the good and bad to the bad.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देखि | देखकर | seeing |
| प्रभाउ | भरत का प्रभाव | Bharata’s influence |
| सुरेसहि | देवराज इंद्र को | to Indra, king of the gods |
| सोचू | चिंता हुई | anxiety arose |
| जगु | संसार | the world |
| भल | भला | good |
| भलेहि | भले व्यक्ति के लिए | to a good person |
| पोच | बुरे व्यक्ति | a bad person |
| कहुँ | के लिए | for |
| पोचू | बुरा | bad |
2 गुर सन कहेउ करिअ प्रभु सोई। रामहि भरतहि भेंट न होई।।
English explanation
Indra said to his teacher, 'Master, take such measures that Rama and Bharata do not meet.'
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गुर | देवगुरु बृहस्पति | Brihaspati, teacher of the gods |
| सन | से | to |
| कहेउ | कहा | said |
| करिअ | कीजिए | please do |
| प्रभु | हे प्रभु | O master |
| सोई | वही उपाय | that very measure |
| रामहि | राम की | of Rama |
| भरतहि | भरत से | with Bharata |
| भेंट | भेंट | meeting |
| न | न | not |
| होई | हो | take place |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.217
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 524
- सहायक विषय
- इन्द्र-बृहस्पति-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 524, 524
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।