अयोध्याकाण्ड · दोहा 217 · दोहा/सोरठा
रामु सँकोची प्रेम बस भरत सपेम पयोधि।
रामु सँकोची प्रेम बस भरत सपेम पयोधि।
बनी बात बेगरन चहति करिअ जतनु छलु सोधि।।217।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.217 · पुस्तक पृ. 524, 524
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1रामु सँकोची प्रेम बस भरत सपेम पयोधि।
राम संकोचशील हैं और प्रेम के वश में हैं; भरत प्रेम से भरे हुए समुद्र हैं।
English explanation
Rama is tenderly reluctant to refuse and is swayed by love; Bharata is an ocean brimming with love.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रामु | राम | Rama |
| सँकोची | संकोचशील, किसी का मन रखने वाले | considerate and reluctant to refuse |
| प्रेम | प्रेम के | by love |
| बस | वश में | swayed |
| भरत | भरत | Bharata |
| सपेम | प्रेम से भरे | full of love |
| पयोधि | समुद्र | ocean |
2 बनी बात बेगरन चहति करिअ जतनु छलु सोधि।।217।।
बनी हुई बात बिगड़ने को है; कोई छल खोजकर उपाय कीजिए।
English explanation
The arrangement already secured is about to unravel; devise a stratagem and make an effort to prevent it.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बनी | बनी हुई, सँवरी हुई | already secured |
| बात | बात, व्यवस्था | arrangement |
| बेगरन | बिगड़ने | to unravel |
| चहति | वाली है, होने को है | is about to |
| करिअ | कीजिए | please make |
| जतनु | प्रयत्न, उपाय | an effort |
| छलु | छल, कपटयुक्त योजना | a deceptive stratagem |
| सोधि | खोजकर, सोच निकालकर | having sought out or devised |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 217
- स्रोत अभिलेख
- 2.217
- सहायक विषय
- इन्द्र-बृहस्पति-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 524, 524
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।