अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
यह बड़ि बात भरत कइ नाहीं। सुमिरत जिनहि रामु मन माहीं।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दभरतजीके लिये यह कोई बड़ी बात नहीं है, जिन्हें श्रीरामजी स्वयं अपने मनमें स्मरण करते रहते हैं। जगत्में जो भी मनुष्य एक बार 'राम कह लेते हैं, वे भी तरने-तारनेवाले हो जाते हैं!॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 524 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
यह बड़ि बात भरत कइ नाहीं। सुमिरत जिनहि रामु मन माहीं।।
बारक राम कहत जग जेऊ। होत तरन तारन नर तेऊ।।
स्रोत अभिलेख 2.217 · पुस्तक पृ. 524, 524
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 यह बड़ि बात भरत कइ नाहीं। सुमिरत जिनहि रामु मन माहीं।।
English explanation
This is no great wonder for Bharata, whom Rama himself remembers in his heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| यह | यह | this |
| बड़ि | बड़ी, असाधारण | great or extraordinary |
| बात | बात | matter |
| भरत | भरत | Bharata, Rama’s brother |
| कइ | के लिए | for |
| नाहीं | नहीं है | is not |
| सुमिरत | स्मरण करते हैं | remembers |
| जिनहि | जिन्हें | whom |
| रामु | राम | Rama |
| मन | मन | heart |
| माहीं | में | within |
2 बारक राम कहत जग जेऊ। होत तरन तारन नर तेऊ।।
English explanation
Whoever in this world says 'Rama' even once becomes able to cross over and to carry others across.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बारक | एक बार भी | even once |
| राम | राम का नाम | the name of Rama |
| कहत | कहता है | utters |
| जग | संसार में | in the world |
| जेऊ | जो कोई भी | whoever |
| होत | हो जाता है | becomes |
| तरन | स्वयं संसार-सागर से पार होने वाला | one who crosses worldly existence |
| तारन | दूसरों को पार कराने वाला | one who carries others across |
| नर | मनुष्य | person |
| तेऊ | वह भी | that person too |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.217
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 524
- सहायक विषय
- इन्द्र-बृहस्पति-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 524, 524
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।